उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) क्या है एवं उसकी शाखाएं

उद्यान विज्ञान (हार्टिकल्चर) क्या है एवं उसकी शाखाएं what is horticulture and its branches in hindi


फल, फूल एवं सब्जियों का अध्ययन उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) के अंतर्गत ही किया जाता है।

उद्यान विज्ञान, कृषि विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत फल, फूल एवं सब्जियों का विस्तार पूर्वक अध्ययन किया जाता है, उसे उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) कहा जाता है, अथवा इसे उद्यानिकी के नाम से भी जाना जाता है ।


ऐसी फसलें जो उद्यान में उगाई जाती है, उन्हें उद्यान सस्य (Horticulture crops in hindi) कहते है।

उद्यान विज्ञान का संबध फल, फूल एवं सब्जियों आदि उगाने से है, जिसे उद्यानिकी भी कहा जाता है ।


उद्यान विज्ञान (हार्टिकल्चर) क्या है? Horticulture in hindi



उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) क्या है एवं उसकी शाखाएं
उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) क्या है एवं उसकी शाखाएं

उद्यान विज्ञान (हार्टिकल्चर) शब्द का अर्थ horticulture meaning in hindi


'Horticulture' शब्द लैटिन 'Hortus means garden' तथा 'Cultura means Cultivation' से लिया गया है । 

अर्थात् “Cultivation of Garden Crops and Plants ”

Garden शब्द की उत्पत्ति, शायद “Gyrden" से हुई है, जिसका अर्थ घर के आसपास किसी सीमित घिरे हुए क्षेत्र में फल, अलंकृत तथा शाक - भाजियों वाले पौधे उगाना है ।


उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) में फल, फूलों एवं सब्जियों को एक साथ उगाना उद्यान विज्ञान कहलाता है ।


उद्यान विज्ञान (हार्टिकल्चर) की परिभाषा Defination of Horticulture in hindi 


यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है 'Hortus' जिसका अर्थ है उद्यान तथा 'Culture' का तात्पर्य कृषि या उगाने से है ।


इस प्रकार हॉर्टिकल्चर की परिभाषा निम्न प्रकार से दी जा सकती है-


Literally, the word Horticulture means “garden culture" or cultivation of garden crops and plants and this implies the cultivation within rather restricted areas.


उद्यान एक विस्तृत शब्द है, जिसका तात्पर्य किसी घिरे हुये स्थान में फल सब्जियों एवं फल वाले या अलंकत पौधों को उगाने से होता है ।


जब किसी स्थान पर केवल फल वाले पौधे पैदा किये जाते हैं तो उसको हम 'Orchard' के नाम से पुकारते हैं ।


उद्यान विज्ञान (Horticulture in hindi) में खेती करना  कला एवं विज्ञान दोनों ही कहा जा सकता है ।


इसके अन्तर्गत बहुत - सी क्रियायें ऐसी हैं; जैसे - पेड़ व पौधों की काट - छाँट करना, पौधों के प्रसारण की विधियाँ  पौधों को एक स्थान से उखाड़कर दूसरे स्थान पर लगाना इत्यादि।


जिनको करने के लिये विशेष अनुभव व तरीकों की आवश्यकता होती है, जोकि एक कला है ।


लेकिन इन क्रियाओं के बारे में विशेष ज्ञान होना; जैसे - ये क्रियायें क्यों करनी चाहियें, किस समय करनी चाहियें, इनको न करने से क्या नुकसान होगा इत्यादि ही विज्ञान कहलायेगा ।


इन्हे भी देखें


उद्यान विज्ञान (हार्टिकल्चर) किसे कहते हैं Horticulture in hindi


उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi) भारतवर्ष में फल, फूल तथा सब्जियों की खेती हजारों वर्ष पहले से की जा रही है लेकिन इनकी खेती पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया ।


खेत - शस्यों (Field Crops) तथा उद्यान शस्यों में एक दम अन्तर नहीं किया जा सकता, हैं जैसे कि चावल को छोटे क्षेत्र या उद्यान में उगाने पर भी खेत - शस्य (Field Crop) ही कहेंगे ।


फ्रांस और अमेरिका में अंगूर बड़े क्षेत्रों 1000 एकड़ से 3000 एकड़ तक में उगाया जाता है, परन्तु सारे संसार में अंगूर को उद्यान - शस्य (Horticultural Crop in hindi) ही कहते हैं ।


भारत तथा विदेशों में आलू छोटे तथा बड़े दोनों प्रकार के खेतों में उगाया जाता है, उसको खेत - शस्य (Agronomical Crop) और उद्यान शस्य (Horticultural Crop in hindi) दोनों ही मानते हैं ।


उद्यान विज्ञान की शाखाएं Horticulture branches in hindi 


  • फलोत्पादन विज्ञान ( Pomology ) 
  • शाकोत्पादन विज्ञान ( Olericulture ) 
  • पुष्पोत्पादन विज्ञान व अलंकृत बागवानी ( Floriculture and Ornamental Gardening ) 
  • फल परिक्षण विज्ञान ( Fruit Preservation Technology )


उद्यान विज्ञान की प्रमुख शाखाएं


उद्यान विज्ञान एक विस्तृत विज्ञान है, इसकी निम्नलिखित मुख्य शाखायें हैं -


1. फलोत्पादन विज्ञान ( Pomology ) -


वह विज्ञान है, जिसमें फलोत्पादन वाली फसलों का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


2. शाकोत्पादन विज्ञान ( Olericulture ) -


वह विज्ञान है, जिसमें शाकोत्पादन वाली फसलों का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


3. पुष्पोत्पादन विज्ञान व अलंकृत बागवानी ( Floriculture and Ornamental Gardening ) -


वह विज्ञान है, जिसमे पुष्पोत्पादन एवं बागों को अलंकृत करने का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


4. फल परिक्षण विज्ञान ( Fruit Preservation Technology ) -


वह विज्ञान है, जिसमें फल एवं शाक - भाजियों के परिक्षण का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


उद्यान विज्ञान का क्षेत्र Scope of Horticulture in hindi


भारत वर्ष में उद्यानिकी का क्षेत्र विस्तार की प्रबल सम्भावनायें हैं ।


यहाँ पर विभिन्न प्रकार की मिट्टी तथा जलवायु उपलब्ध है जिसमें विभिन्न प्रकार के फल, सब्जियाँ तथा आलंकृत पौधे उत्पन्न किये जा सकते हैं ।


सरकार ने इसकी उन्नति हेतु बहुत - सी योजनायें शुरू की है तथा धन व्यय किया है ।


इसको अधिक प्रोत्साहन देने हेत सरकार द्वारा बहुत - सी छूटे तथा सुविधायें भी प्रदान की गई हैं ।


जैसा कि उद्यानिकी के लिये प्रयोग की जाने वाली भूमि पर लगान में छूट, फलोद्यान की भूमि सालिंग एक्ट में सम्मलित न करना, सिंचाई की सुविधा देना, उन्नतिशील कृषि यंत्रों की सुविधा प्रदान करना ।


अनुसंधान  कार्य द्वारा नई जातियों को निकालना या बाहर से मंगवाकर देना, हानिकारक कीट एवं बीमारियों की रोकथाम के लिये सझाव एवं सुविधा प्रदान करना, फलों का बाग लगाने हेतु धन का वितरण करना इत्यादि ।


इस प्रकार से उद्यानिकी के विकास एवं उन्नति हेतु द्वितीय पंचवर्षीय योजना में सरकार ने 13 करोड़ रुपये व्यय किये थे तथा अगली पंचवर्षीय योजनाओं में इसके लिये और भी अधिक धन व्यय किया गया ।


सातवीं पंचवर्षीय योजना में केन्द्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों उत्तराखंड में बागवानी की उन्नति हेतु 57 करोड़ रुपये मूल्य की योजना लागू की है ।


सरकार ने बागवानी के विकास के लिए 7वीं पंचवर्षीय योजना में 14.64 करोड़ रुपये, आठवीं में 6, 000 करोड़ रु०, नवमी में 1374 करोड़ रु० खर्च किये । 10 वीं, 11 वीं, 12 वीं पंचवर्षीय योजनाओं में इसके विकास हेतु और अधिक धन खर्च किया गया ।


उद्यानिकी का विस्तार एवं भविष्य


कुछ वर्षों पहले खाद्य समस्या के पैदा हो जाने पर जनता व सरकार का ध्यान फल व सब्जियों को उगाने की ओर गया क्योंकि सब्जियाँ शीघ्र पैदा हो जाती हैं तथा खाद्य समस्या में अनाज की अपेक्षाकृत अधिक सहयोग कर सकती हैं ।


फलों व सब्जियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खाद्य तत्व तथा विटामिन पर्याप्त रूप से मिलते हैं जिससे शरीर स्वस्थ रहता है ।


भूमि एवं जलवायु ( Soil and Climate ) -


भारतवर्ष में विभिन्न प्रकार की मिट्टी तथा जलवायु उपलब्ध है, जिसमें प्रत्येक प्रकार की सब्जी, फल व फूल वाले आलंकृत, पौधे देश के किसी न किसी भाग में पैदा किये जा सकते हैं ।


जैसे कि शीतोष्ण, सब्जी व आलंकृत पौधे देश के पर्वतीय भागों में तथा उष्ण प्रदेशीय फल, सब्जी व आलंकृत पौधे मैदानी भागों में सफलतापूर्वक उत्पन्न किये जा सकते हैं ।


यातायात के साधन ( Transport Means ) -


इस समय यातायात के साधनों में काफी सुधार हो चुका है तथा बराबर होता जा रहा है जिससे फल, सब्जियों व आलंकृत पौधों को विक्रय हेतु दूर वाले बाजारों में भेजा जा सकता है ।


सामुदायिक विकास योजनाओं का अभिनय -


सामुदायिक विकास योजनायें लगभग समस्त देश में चलाई जा रही हैं जिनका कि मुख्य उद्देश्य देश की उन्नति व विकास करना है ।


इनका विकास योजनाओं द्वारा उद्यानिकी को काफी अधिक विकसित किया जा सकता है ।


इन्हे भी देखें


वन महोत्सव –


सन् 1950 से हमारे देश में वन महोत्सव सप्ताह मनाया जा रहा है जिसके दौरान सारे देश में काफी संख्या में वृक्षारोपण किया जाता है ।


इस प्रकार से हमारे देश में नागरिकों में पौधे लगाने का काफी चाव है लेकिन कुछ भारी परिस्थितियों वश अधिक प्रगति नहीं की जा सकी है ।


वन महोत्सव के उद्देश्य निम्नलिखित हैं -


सड़कों के दोनों तरफ छायादार वृक्षों का रोपण करना ।

नदियों व तालाबों के किनारे छायादार वृक्ष लगाना ।

परती या बेकार भूमि में वृक्ष लगाना ।

खेतों की मेड़ों पर वृक्ष लगाना ।


वन महोत्सव सप्ताह में अभी तक करोड़ों पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिससे देश को काफी लाभ पहुँचा है ।


पर्यावरण विभाग की स्थापना -


भारत सरकार द्वारा पर्यावरण की तरफ अधिक ध्यान दिया जा रहा है ।


पर्यावरण विभाग की स्थापना इस उद्देश्य से की गई है जिससे आलंकृत पौधों का रोपण अधिक से अधिक संख्या में किया जा सके ।


अधिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने के लिये सरकार प्रतिवर्ष कुछ पुरस्कारों द्वारा धनराशि बाँटती है जैसे - इन्द्रा प्रियदर्शिनी पुरस्कार, वृक्ष मित्र पुरस्कार इत्यादि ।


सिंचाई के साधन -


सफल सब्जी, फल एवं पुष्प उत्पादन के लिये पानी बहुत ही आवश्यक हैं ।


फूल, फल एवं सब्जियाँ अनाज वाली फसलों की तुलना में प्रति इकाई क्षेत्रफल अधिक लाभ देती है ।


अतः सिंचाई के साधन के ऊपर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है ।


फल - फूल एवं सब्जी के पौधों की नर्सरी -


फल, फूल एवं सब्जी वाले पौधों की नर्सरी लगाकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है ।


बहुत से आलंकृत पौधे जैसे - रबर प्लांट डिफिनवेचिया, एरोकेरिया, कैलेडियम, साइकस इत्यादि ऐसे हैं, जिनकी कीमत काफी अधिक होती है ।


अतः उनसे अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है ।


उत्तराखंड में टिशू कल्चर के प्रोत्साहन की व्यापक योजना -


सरकार ने उत्तरांचल में उद्यान एवं कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने तथा वाणिज्यिक स्तर पर उनका विकास करने के उद्देश्य से 35 लाख रुपये की लागत से टिशूकल्चर योजना लागू की है ।


उद्यानिकी की उन्नति के लिये निम्नलिखित सुझाव दिये जा सकते हैं -


जनता को इसके प्रति अधिक रुचि जागरुक करने हेतु उद्यान विज्ञान समितियों का गठन करना ।


इस विषय पर अच्छे व सुन्दर सूचना - पत्र प्रकाशित करना ।


अधिक फल - फूल व सब्जी की प्रदर्शिनी व उद्यान प्रतियोगताओं का आयोजन करन , इत्यादि ।


उद्यान - कृषि सम्बन्धी वर्गीकरण ( Horticultural Classification in hindi )


उद्यान कृषि वर्गीकरण पौधे के उगने व वृद्धि करने के समय के अनुसार एवं कुछ आवश्यक गुणों को ध्यान में रखकर किया गया है ।


( 1 ) एक वर्षीय पौधे ( Annual Plants ) -


ऐसे पौधे जो अपना समस्त जीवन एक मौसम में पूर्ण कर लेते हैं, इसके अन्दर सम्मलित किये गये हैं ।

इनके समस्त जीवन का समय 3 से 6 महीने तक का हो सकता है ;


जैसे - मक्का , टिण्डा , टमाटर जीनियाँ आदि ।


( 2 ) द्विवर्षीय पौधे ( Biennial plants ) -


इसके अन्दर ऐसे पौधे सम्मलित हैं जो एक मौसम में अपनी वृद्धि करते हैं तथा दूसरे मौसम में फलते - फूलते व बीज बनाते हैं ;


जैसे - गाजर मूली , पात गोभी , स्केविओसा आदि । इनके जीवन का समय 6 - 9 महीने होता है ।


( 3 ) हरवेसियस बहुवर्षीय पौधे ( Herbaceous Perennial Plants ) -


ऐसे पौधे जो अपना जीवन एक वर्ष से अधिक समय तक रखते हैं तथा मुलायम स्वभाव के होते हैं,


जैसे - बहुवर्षीय गुलदावदी ( Perennial chry - Santhemum ) सोलीडेगो ( Solidago ), जखैरा ( Gerbera ) इत्यादि ।


( 4 ) काष्ठित बहवर्षीय पौधे ( Woody perennial plants ) -


जो पौधे बहुवर्षीय होते हैं तथा उनकी लकड़ी काफी सख्त होती है ,


जैसे - समस्त फल एवं फूल वाले पौधे इनको दो भागों में विभक्त किया जा सकता है -

बड़े पेड़ ( Tall Trees ) ,

छोटे पौधे ( Shrubs ) या झाड़ी।


( 5 ) चढ़ने वाले बहुवर्षीय पौधे ( Climbing perennial plants or climbers ) -


इसके अन्दर सब्जी फल तथा फूल वाले पौधों की समस्त बेलें सम्मलित हैं ;


जैसे - सेम , रगून कीपर , अंगूर इत्यादि ।

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