गमलों में पौधे (gamla in hindi) कैसे लगाएं एवं गमलों की देखभाल कैसे करें?

स्थान की कमी वाले घरों में गमला (gamla in hindi) में पौधे लगाना बागवानी की सबसे सुगम विधि है ।

गमला (flower pot in hindi) में लगे पौधों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना सरल होता है । और गमलों से मकान के अंदर के भागों को भी अलंकृत किया जा सकता है ।

कुछ पौधों को भूमि के बजाय गमला (pot in hindi) में सरलता से उगाया जा सकता है, जैसे - मृदु बिगोनिया गमलों में उगाने वाले पौधों का उदाहरण है ।

"गमलों में पौधे उगाने की क्रियात्मकता को गमला विज्ञान (pot-culture in hindi) कहते हैं ।"


गमला क्या होता है? | gamla in hindi | flower pot in hindi


सामान्यता: गमला (gamla in hindi) चिकनी मिट्टी को अग्नि में पकाकर बनाए जाते है, ये छिद्रित होते हैं ।

पौधों के स्वास्थ्य के लिए छिद्रित गमला (gamla in hindi) अच्छा माना जाता है, क्योंकि इन गमलों में वातन एवं नमी का विनिमय में होता है ।

मिट्टी के गमले विभिन्न आकार 5 सेंटीमीटर से 45 सेंटीमीटर तक के बनाए जाते हैं । जिससे ऊपर की ओर जड़ों को अधिक पोषणीय मृदा प्राप्त होती है ।

विविध उद्देश्य के लिए विभिन्न आकार वह आकृति के गमले (flower pot in hindi) बनाए जाते हैं ।

आजकल गमले कांक्रीट - सीमेंट के भी बनाए जाते हैं, जोकि अपेक्षित अधिक लंबी अवधि तक चलने वाले होते हैं ।

अब वर्तमान समय में पॉलिथीन के गमले भी प्रचलित हो रहे हैं ।


गमलों में पौधे कैसे लगाएं एवं उनकी देखभाल कैसे करें, पूरी जानकारी


किसी निश्चित पौधे को लगाने के लिए उपयुक्त आकार परिमाण का गमला (gamla in hindi) लेना चाहिए ।

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गमलों में पौधे (gamla in hindi) कैसे लगाएं एवं गमलों की देखभाल कैसे करें पूरी जानकारी

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पौधों को गमले में लगाने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें?


गमलों में पौधे लगाने से पहले उन्हें स्वच्छ कर लेना चाहिए ।

विशेषरूप से उन गमलों (flower pot in hindi) का जिनका पुन: उपयोग किया जाना है सोडा युक्त जल से घो कर स्वच्छ करना चाहिये ।

इससे रोग जनक कवक, बैक्टीरिया, मोल्ड्स, निमेटोड्स इत्यादि का लगाये जाने वाले पौधों पर रोग से प्रभावित होने का खतरा नहीं रहता है ।

नये गमला (gamla in hindi) को जल से धोना इस लिये आवश्यक है कि नये कोरे गमले मृदा में से नमी सोख लेते हैं ।


गमले में पौधे कैसे लगाएं? | flower pot in hindi gamla


पौधों का रोपण गमले के केंद्र मैं करना चाहिए तथा उपयुक्त गहराई में रोपित करना चाहिए ।

गमले को भरने से पहली तल के जल निकासी छिद्र पर उपयुक्त आकार का नतोदर (concave) पार्श्व निचे की ओर कर के कंकड (Crock) ढक देते हैं जिससे मृदा से छिद्र अवरुद्ध न होने पाये ।

इसके ऊपर कई छोटे, छोटे कंकड रख देते हैं । इसके ऊपर पत्तियों की अधं गली खाद बिछा देते हैं । तब कम्पोस्ट मृदा भर दी जाती है ।

शीर्ष पर 1.5-2.5cm स्थान खाली रखते हैं । जिस में जल भरा जा सके ।

कम्पोस्ट - मृदा की सतह पर कोयले, सिन्डर या ईंट के छोटे टुकड़े रख देते हैं जिससे कम्पोस्ट बह कर बाहर न निकले तथा नमी (moisture) बनी रहे ।


गमला (gamla in hindi) की फोर्क से निराई करने के उपरान्त फव्वारे से जल देना चाहिये ।

पौधे की जड़ों पर लगे चिकनी मिट्टी के गोले (earth ball) को जल से भीगों कर (Soaking) रोपण से तुरन्त पहले तोड़ देना चाहिये ।

पौधे के मिट्टी के गोले को गमले में 3-5 cm गहरा लगाना चाहिये तथा पौधे को कम्पोस्ट - मृदा में दृढ़ता से स्थिर कर देना चाहिये ।


गमलों में पौधों के पुन: रोपण से आप क्या समझते हैं?


गमलों की पुनः रोपण एक आवश्यक प्रक्रिया है ।

जब गमला (gamla in hindi) लगे पौधे की जड़े गमले में पार्श्व में निकल कर मुड़ने लगती है तब गमले की पुनः भराई की जानी चाहिये ।

यह प्रेक्षण उस जाति के एक या दो पौधों को गमले में से पलट कर निकालने कर देखने से किया जाता है ।

पुनः रोपण काल में पौधा सुसुप्त या विश्राम अवस्था में नहीं होना चाहिये अर्थात् गमले की पुन: रोपण पौधे की क्रियाशील वृद्धि काल में ही की जानी चाहिये ।

मैदानी क्षेत्रों में वर्षा काल इस प्रक्रिया के लिए सर्वोत्तम होता है ।


गमले की पुनः रोपण क्या है - "किसी गमले के पौधे को ताजी कपोस्ट - मृदा युक्त दूसरे उपयुक्त गमले में स्थानांतरित करना पुनः रोपण (repotting in hindi) कहलाता है ।"


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गमलों में पौधों के पुन: रोपण कैसे किया जाता है?


पुनः रोपण के लिये गमले में लगे पौधे को सावधानी पूर्वक बाहर निकाल लेते हैं तथा दूसरे गमले में रोपित कर दिया जाता है ।

यदि मिट्टी के गोले से बाहर निकली जड़े बहुत अधिक नहीं है तो समान आकार के गमले मे पुनः रोपित करते हैं ।

यदि जड़े बहुत अधिक निकली है तो आपेक्षित बड़े गमले में रोपित किया जाना चाहिये ।

यदि आवश्यक प्रतीत होता है तब जड़ों का कृन्तन (pruning in hindi) आवश्यकतानुसार कर देना चाहिये ।

यदि कम्पोस्ट (compost in hindi) खराब हो गयी है तब मिट्टी के गोले (earth ball) के चारो ओर गमले में नयी कम्पोस्ट मृदा भर देनी चाहिये तथा पौधे को गमले में दृढ़ता से स्थिर कर देना चाहिये ।


गमले की पुनः रोपण की आवश्यकता कब होती है?


जब गमले के पाश्वों में पौधे की जड़े निकल कर मुड़ने लगती है तथा कम्पोस्ट खराब हो जाती है, तब पुनः रोपण करना चाहिये ।


गमले में पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल?


गमले में पौधा रोपण के उपरांत जल देना अति आवश्यक होता है तथा गमले को साए स्थानांतरित कर देना चाहिए ।

पौधे के स्थापित होने पर धूप में रखना चाहिए धूप में रखने का समय प्रतिदिन धीरे-धीरे बढ़ाते रहना चाहिए ।

गमले (pots in hindi) के पोषक तत्वों का उपयोग पौधा जल्दी ही कर लेता है ।

अतः इसकी आपूर्ति के लिए द्रव्य खाद डालना चाहिए नियमित अंतराल से द्रव्य खाद डालनी चाहिए । लगभग 15 दिन के अंतराल से देना उपयुक्त रहता है

खाद देने की दूसरी विधि यह है, कि गमले की ऊपर सताए के 2 से 7 सेंटीमीटर मरदा की तरह निकाल बाहर करके सही नई ताजी कपोस्ट से भर देते हैं ।

यह विधि लगभग 6 माह के अंतराल से दो रानी चाहिए ।

सिंचाई एवं धूप से सतह की कंपोस्ट मृदा सख्त हो जाती है अतः फोर्क से सतहकी निराई गुड़ाई करते रहना चाहिए जिससे मृदा में वायु संचार सुचारू रूप से होता रहे तथा जल प्रवेशन सरलता से होता रहे ।

इससे जड़ों की वृद्धि तद्न्तर पौधों की वृद्धि स्वास्थ्य कारक रूप से होती रहती है ।

आमतौर से गमले को दो ईंटों को पार्श्व पार्श्व मैं स्थाई कर उन पर रखते हैं ।


गमले वाले पौधों के लिए खाद कैसे बनाये?


गमले भरने की मृदा - कम्पोस्ट का सर्वोत्तम घटक उद्यान या खेत की दोमट मृदा होती है जो कि इसका सबसे बड़ा भाग होती है, इसके अतिरिक्त पत्तियों की खाद, मोटा बालु, अच्छी प्रकार से सड़ा गला खाद तथा राख होती है ।


गमला रोपण की कपोस्ट - मृदा | potting compost-soil in hindi


सामान्यत: कम्पोस्ट के घटकों का अनुपात आवश्यकतानुसार परिवर्तित किया जा सकता है ।


आमतौर से कम्पोस्ट के घटक निम्न प्रकार होते हैं -

  • उद्यान की अच्छी दोमट मृदा - 2 भाग
  • पत्तियों की खाद - 1भाग
  • अच्छा सड़ा खाद - 1/2 भाग
  • मोटा नदी का बालु - 1/2 भाग

कम्पोस्ट का भण्डारण गमलों की गृह में कर लेना चाहिये । गमले भरते समय कम्पोस्ट मध्यमान रूप से नम (moderately moist) होनी चाहिये ।


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गमले के लिए मिट्टी कैसे तैयार करें?


कम्पोस्ट के घटकों में से घास की जड़े तथा पत्थर अलग कर देने चाहिये ।

बीज बोने तथा कलम लगाने के लिए कम्पोस्ट को छान लेना चाहिये ।

कम्पोस्ट के घटकों को तहों से लगाकर अच्छी प्रकार मिश्रित कर लेना चाहिये ।

उदाहरणतः उपरोक्त प्रकार की कम्पोस्ट को मिश्रित करने के लिए पहले भूमि पर उद्यान मृदा फैला दिया जाता है, उसके ऊपर पत्तियों की खाद की तह फैला देते हैं तथा इस प्रकार से ही उसके ऊपर खाद तथा बालु की तह फैला देते हैं ।

इस प्रक्रिया को बार - बार दोहरा कर अच्छा ढेर बना लेते हैं । इसे हल्का नम कर लिया जाता है । तथा ढेर के घटकों को कई बार उल्ट - पलट कर अच्छी प्रकार मिला लेते हैं ।


गमले में पौधे लगाने के बाद जल देना?


जल देने की अव्यवस्था एवं अनियमितता से सामान्यत: गमले के पौधे प्रभावित होते हैं ।

अधिक जल देने से कम्पोस्ट खराब हो जाती है तथा मृदा में वायु संचार सुचारु रूप से नहीं होता है । जल की न्युनता से पौधा शुष्क हो जाता है ।

अत: जल देने का समायोजन आवश्यकतानुसार उचित होना चाहिए । प्रत्येक बार जल देने का समायोजन इस प्रकार होना चाहिये कि गमले की कम्पोस्ट मृदा शुष्क हो जाये परन्तु पौधा न मुरझाये ।

प्रत्येक जाति के पौधे की जल की आवश्यकता भिन्न - भिन्न होती है । अधिक पत्तियों युक्त सरस पौधों को अधिक जल की आवश्यकता होती है जबकि काष्टीय एवं मरुद्भिदों को थोड़े जल की आवश्यकता होती है ।

गमले (flower pot in hindi) में जल की मात्रा इतनी डालनी चाहिये जिससे सम्पूर्ण कम्पोस्ट तर हो जाये परन्तु जल गमले से बाहर न बहे ।

ग्रीष्म ऋतु में फुब्बारे से अतिरिक्त जल डालना भी गमले के पौधों के लिय लाभदायक होता है ।


गमले में जल कब देना चाहिए?


जब गमला (gamla in hindi) की कपोस्ट शुष्क हो जाए, परंतु पौधा मुरझाए नहीं तब गमले में जल देना चाहिए ।

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