शैल उद्यान क्या है इसके लिए उपयुक्त पौधे एवं शैल उद्यान की निर्माण विधि

शैल उद्यान (rock garden in hindi) की योजना इस प्रकार से बनाई जाती है कि जिससे वह प्राकृतिक पहाड़ी के समान प्रतीत होती है ।

शैल उद्यान (rock garden in hindi) में मिट्टी तथा शैलो-पत्थरों से इस प्रकार की व्यवस्था करनी चाहिए जिस पर विविध प्रकार के पौधे उगाने की परिस्थिति उत्पन्न हो जाएं ।

शैल उद्यान (rock garden in hindi) या अल्पाईन उद्यान 2000 से 2500 मीटर के ऊंचाशं से नीचे निर्मित नहीं किए जा सकते हैं क्योंकि अल्पाईन पौधे इससे निम्न ऊंचाशं पर अच्छी प्रकार से नहीं उगते हैं ।


शैल उद्यान क्या होते है इनकी परिभाषा? | defination of rock garden in hindi


शैल उद्यान, उद्यान के क्षेत्र में स्थित होना चाहिए क्योंकि शैल उद्यान (rock garden in hindi) को धूप तथा प्रकाश अच्छा मिलना आवश्यक होता है ।

शैल उद्यान (rock garden in hindi) लंबे वृक्षों के छाये से दूर स्थित होना चाहिए । तथा इसमें जल निकास की व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए ।

शैल उद्यान (rock garden in hindi) के दक्षिणी भाग पर धूप चाहने वाले पौधे तथा उत्तरी भाग पर साया चाहने वाले पौधे लगाना उपयुक्त होता है ।

शैल उद्यान क्या है इसके लिए उपयुक्त पौधे एवं शैल उद्यान की निर्माण विधि, rock garden in hindi, शैलीय क्या होती है, rockery in hindi, शैलीय उद्यान पौधे
शैल उद्यान क्या है इसके लिए उपयुक्त पौधे एवं शैल उद्यान की निर्माण विधि

शैल उद्यान की परिभाषा - "शैल उद्यान अलंकृत बागवानी की सर्वोत्तम आकर्षण की विशिष्टता होती है ।"

शैल उद्यान मानव निर्मित होते हैं अत: ये शैल उद्यान (rock garden in hindi) कृत्रिम होते हैं तथापि इनकी दृश्यावली विन्यास प्राकृतिक होना चाहिए ।


ये भी पढ़ें :-


शैल उद्यान की स्थिति क्या होनी चाहिए?


शैल उद्यान (rock garden in hindi) 2000 से 2500 मीटर ऊंचाश पर निर्मित किए जाने चाहिए ।

अलंकृत बागवानी में इनकी स्थिति खुले स्थान में होनी चाहिए जहां पर सूर्य की धूप एवं प्रकाश अच्छी प्रकार उपलब्ध होता है ।


शैल उद्यान की निर्माण कैसे किया जाता है? | Construction of rock garden in hindi


शैल उद्यान (rock garden in hindi) में चट्टानों का चयन तथा उनका विन्यास महत्वपूर्ण होता है सामान्यतः चट्टाने देशिक (local) उत्पत्ति को छिद्रित एवं ऋतु दलित प्रतित होनी चाहिये ।

चुने के पत्थर (lime stone) उपयुक्त रहने हैं । समाकार लगभग 60 cm के पत्थरों का चयन करना चाहिये ।

कुछ बड़ी चट्टानों का उपयोग करना भी उपयुक्त रहता है । पौधे केवल चट्टानों पर ही नहीं उगते हैं उनके लिये अच्छी मृदा की भी आवश्यकता होती है ।

पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक उपयुक्त मृदा सरलता से उपलब्ध हो जाती है ।

मैदानी क्षेत्रों में मोटे बालु युक्त मृदा, काफी अक्ष अनुपात में पत्तियों की खाद तथा FYM (गोबर की सड़ी खाद) पौधों के लिये उपयुक्त रहती है ।

चट्टानीय श्रेणी के लिये ऊपर की 15-45 cm स्तर कम्पोस्ट मृदा से बनाया जाता है नीचे का टिल्ला (mound) मिट्टी का बनाया जाता है ।

निम्न स्तर की मिट्टी में अच्छा जल निकास होना चाहिये तथा इसमें नमी बनाये रखने की क्षमता होनी चाहिये ।


शैल उद्यान की निर्माण विधि


शैल - उद्यान अलंकृत उद्यानों की स्थायी तथा महत्वपूर्ण संरचना होती है अतः इसकी स्थलकृति का चयन सावधानीपूर्वक बनायी गई योजना द्वारा किया जाना चाहिये ।

शैल - उद्यान के आस पास जल - उद्यान का होना अति - अकर्षक दृश्यावली उत्पन्न करता है ।

शैल उद्यान (rock garden in hindi) से निकली टेढ़ी - मेढ़ी जल धारायें जलाशय तक मिला देनी चाहिये ।

शैल उद्यान पर जल - प्रपात अति सुन्दर प्रतीत होता है जिसका सम्बन्ध जल धाराओं द्वारा जलाशय तक हो ।

पहले मिट्टी का टील्ला (mound) बनाया जाता है । टील्ले को पहले सुदृढ़ बना लेना चाहिये । पत्थरों तथा चट्टानों को इस प्रकार स्थापित करना चाहिये जिससे पौधों की जड़ों को सरंक्षण प्राप्त हो ।

पत्थरों को तिरछा - ढलाव की स्थिति में स्थापित करना चाहिये जिससे वर्षा का जल पौधों को उपलब्ध हो सकें ।

कोई भी चट्टान पौधों पर झुकी नहीं होनी चाहिये क्योंकि इससे पौधे को जल आपुर्ति नहीं हो सकेगी । पत्थरों को इस प्रकार व्यवस्थित करने का प्रयास करना चाहिये जिससे वे प्राकृतिक प्रतीत हो ।

पत्थरों के बीच में पौधे लगाने के लिये गर्त छोड़ देने चाहिये जिनका आकार 15cm x 60cm होना चाहिये ।

गड्ढों की आकृति अनियमित होनी चाहिये तथा इनकी संरचना इस प्रकार करनी चाहिये जिससे इनकी कम्पोस्ट बाहर न निकले ।

पत्थरों को यदि पास पास रखना है तो उन्हें बिल्कुल सटा कर रखना चाहिये । पत्थरों को आधार से लगाना प्रारम्भ कर ऊपर शीर्ष की ओर लगाना चाहिये ।

सभी पत्थरों को दृढ़ता से स्थापित कर देना चाहिये । इनके नीचे अथवा आस पास की मिट्टी ढिली नहीं छोड़नी चाहिये ।


शैलाय (rockery in hindi) के ढलान सीधे उर्ध्व नहीं होने चाहिये । सम्पूर्ण व्यवस्था कलात्मक एवं प्राकृतिक प्रतीत होनी चाहिये ।

एक चौड़ा पथ , लगभग 45-60 cm चौड़ा शैलाय पर टेढा - मेढा घाटी एवं दरों में से जाता हुआ बनाना चाहिये जिसके द्वारा सम्पूर्ण शैल उद्यान (rock garden in hindi) के दृष्टिगत किया जा सके । पथ ग्रेवल या पग - पत्थरों (stepping stone) का बनाना चाहिये ।

शैल उद्यान (rock garden in hindi) में अच्छे बड़े तथा सुस्थापित पौधे रोपित करने चाहिये । पौधों का आरोपण पर्वत श्रेणी के समान प्राकृतिक एवं सुन्दर प्रतीत होना चाहिये ।

मैदानी क्षेत्रों में वर्षाकाल पादप रोपण के लिये सर्वोत्तम होता है । पर्वतीय क्षेत्रों में बसन्त ऋतु में पादप रोपण करना चाहिये


शैलीय क्या होती है? | what is rockery in hindi


पर्वतीय श्रेणी के समान बने अलंकृत उद्यान को शैलीय/रोकरी (rockery in hindi) कहते हैं ।

शैलीय के निर्माण में चट्टानों मुख्यतः उपयोग किया जाता है ।

शैली के निर्माण के ऊंचा मिट्टी का टीला, चट्टानों, पत्थरों, मृदा कंपोस्ट एवं पौधे मुख्य घटक होते हैं ।


ये भी पढ़ें :-


शैलीय उद्यान के लिए उपयुक्त पौधों कौन से होते हैं?


वास्तविक शैल उद्यान पर्वतीय श्रेणीयों में ही होते है अत: उनमें ही उपयुक्त पौधे लगाये जाते हैं तथापि अन्य जलवायु में विकसित शैलाय के लिये कैक्टस, सरस, फर्नस तथा अन्य शाकीय पौधे लगाये जाते हैं ।


शैलीय उद्यान के लिए उपयुक्त पौधों के नाम -


1. कैक्टस ( Cactus ) -

  • नागफनी ( Opentia )
  • सिरिअस ( Cereas )
  • मैमिलेरिया ( Mammillaria )


2. सरस ( Secculents ) -

  • अगेव ( Agave )
  • अलोय ( Aloe )
  • इयुफोर्बिबिय स्पलैन्डेन्स ( Euphorbia splendense )
  • गैस्टिरिया ( Gasteria )
  • युक्का ( hicca )
  • सैन्सिवियरा ( Sanseviera )
  • सिडियम ( Sedium )


3. फर्नस ( Ferns ) -

  • पोलिपोडियम ( Polypodium )
  • नैफरोडियम ( Nephrodium )
  • ड्राईनेरिया ( Drynaria )


4. क्षुप ( Shrubs ) -

  • एडिनियम ओबैसम ( Adeneum obesun ) 
  • एसक्लिपियास कुरासाविक ( Asclepias curassavica )
  • केसिया अलाटा ( Cassia alata )
  • कलिस्टैमोन लैन्सियोलाट्स ( Callestemon lancealatus )
  • कलिरोडैन्डरोन मैक्रोसाइफोन ( Cleradendrom macrosiphon )
  • रुजैलिय जुनसिय ( Russelia juncea )
  • थुजा ( Thuja )


5. शाकीय पौधे ( Herbaceous Plants ) -

  • एन्जिलोनिया ग्रैन्डिफ्लोरा ( Angelonia grandiflora )
  • एस्टर एमिलस ( Aster amellus )
  • डैकिआना सैन्ड्रयाना ( Dracaena sanderiana ) आकजैलिस रुबरा ( Oxalis rubra )
  • पोरचुलाका ( Portulaca )
  • पाइलिया मुस्कोसा ( Pilea muscosa )

इनके अतिरिक्त बहुत से पुष्पीय शाकीय पौधे जैसे एलाइसम, एन्टीराइनम, बैलिस, कैन्डिटफ्ट, डायेन्थस, सालविया, वरबिना, वायलो इत्यादि से अलंकृत किया जा सकता है ।


6. पर्वतीय शैलाय के लिए पौधे -

  • एडोनिस वरनेलिस ( Adonis vermalis )
  • एनिमोन ( Anemone )
  • कम्पैनुला ( Campanula )
  • आइरिस ( Iris )
  • लिलयम ( Lilium ) 
  • पोटैन्टिला ( Potentila ) 
  • प्राईमुला ( Prinula )
  • ट्युलिप ( Tulip ) इत्यादि जातियों के पौधे उपयुक्त रहते हैं ।


शैलाय का प्रबन्धन कैसे किया जाता है? | How is rockery managed in hindi


शैलाय के प्रबन्धन के लिए निम्नलिखित प्रक्रियायें करना आवश्यक होता हैं -

  • खरपतावारों का निष्कासन
  • सिंचाई की सुविधाएं
  • पौधों की रक्षा करना
  • पौधों को खाद एवं उर्वरक देना


शैलाय का प्रबन्धन | management of rockery  in hindi


1. खरपतावारों का निष्कासन ( Weeding ) -

शैल - उद्यान में से समय - समय पर खरपतावारों का निष्कासन करना चाहिये तथा सुखी मृत पत्तियों तथा शाखाओं को भी निष्कासित कर देना चाहिये ।


2. सिंचाई ( Irrigation ) -

वर्षात न होने पर आवश्यकतानुसार पौधों को फव्वारे ( Sprinkler ) से सिंचाई कर देनी चाहिये । जिससे वर्षा के समान पौधों को जल मिलता है ।


3. रक्षण ( Protection ) -

अत्यधिक शीतकाल में मृदु पौधों को रक्षण की आवश्यकता होती है । जब पौधे छोटे होते हैं तब पार्वीय दो चट्टानों पर ग्लास शीट से पौधे को ढक देना चाहिये जिससे प्रकाश उपलब्ध होता रहे । बड़े पौधों पर ग्लवेनाइजड़ वायर लगा कर उन पर ग्लास शीट रखकर पौधे का बचाव कर देना चाहिये ।


4. खाद देना ( Manuring ) -

कम्पोस्ट मृदा के खराब हो जाने पर लगभग चार - पांच वर्ष के अन्तराल से पौधों के पुनः रोपण की आवश्यकता पड़ती है । या पौधों को अच्छी उद्यान मृदा, पत्तियों की खाद तथा बालु के समान अनुपात से बनी कम्पोस्ट को पौधों में दे देनी (top dressing) चाहिये या ऊपरी सतह की 5-10 cm मृदा खुरच कर निकाल दे तथा पुनः उसमें हड्डी की खाद (bone meal) मिली कम्पोस्ट से स्थान्तरित कर देना चाहिये या नयी कम्पोस्ट से पुनः भराई कर देना चाहिये ।

Please do not enter any spam link in the comment box.

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Post a Comment (0)

Previous Post Next Post