बागवानी फसलें (Horticulture Crops In Hindi): वर्गीकरण, मिट्टी एवं जलवायु की पूरी जानकारी

 

Horticulture Crops In Hindi
Horticulture Crops In Hindi

उद्यान में पौधों को उगाना, उनकी खेती करना एवं उनके बारे में अध्ययन करना ही बागवानी कहलाता है। बागवानी कला एवं विज्ञान दोनों पर आधारित कृषि है। जो फसलें मुख्य रूप से उद्यान में उगाई जाती हैं, उन्हें ही बागवानी फसलें (Horticulture crops in Hindi) कहा जाता है, जैसे - आम, चाय, अंगूर इत्यादि।

​बागवानी फसलें क्या है? (What is Horticulture Crops)

​सरल शब्दों में, वे सभी फसलें जो उद्यान के अंतर्गत उगाई जाती हैं, उन्हें ही बागवानी फसलें कहा जाता है। इन्हें बागानी फसलों या उद्यान फसलों के नाम से भी जाना जाता है।

बागवानी फसलों के उदाहरण:

  • फल वाली फसलें: आम, केले, अनार, अंगूर आदि।
  • सब्जी वाली फसलें: लौकी, कद्दू, आलू, टमाटर आदि।
  • फूल वाली फसलें: सूरजमुखी, गुलाब, गेंदा आदि।
  • बागानी फसलें: कॉफी, चाय, रबर आदि।

​बागवानी फसलों का वर्गीकरण (Classification of Horticulture Crops)

​पौधों के उगने, वृद्धि करने के समय और उनके गुणों के आधार पर बागवानी फसलों का वर्गीकरण नीचे दी गई तालिका में विस्तार से समझाया गया है:

जीवन चक्र के आधार पर वर्गीकरण

वर्गीकरण (Classification)

विशेषता (Features)

मुख्य उदाहरण (Examples)

एक वर्षीय पौधे (Annuals)

3 से 6 महीने में जीवन चक्र पूर्ण करते हैं।

मक्का, टिण्डा, टमाटर, जीनिया

द्विवर्षीय पौधे (Biennials)

पहले वर्ष वृद्धि और दूसरे वर्ष फल-फूल देते हैं।

गाजर, मूली, पत्तागोभी

हरवेसियस बहुवर्षीय

1 वर्ष से अधिक जीवन और मुलायम स्वभाव।

गुलदावदी, जरबेरा, सोलीडेगो

काष्ठित बहुवर्षीय (Woody)

सख्त लकड़ी वाले स्थायी वृक्ष और झाड़ियाँ।

समस्त फल एवं फूल वाले पेड़

चढ़ने वाले पौधे (Climbers)

फल, सब्जी और फूलों की बेलें।

बागवानी फसलों के लिए उचित मृदा (Soil for Horticulture Crops in Hindi)

​सफल फलोत्पादन के लिए मिट्टी का भौतिक और रासायनिक संगठन बहुत महत्वपूर्ण है। बागवानी के लिए मिट्टी उदासीन (Neutral) प्रकृति की होनी चाहिए।

बागवानी के लिए मिट्टी के प्रकार (Types of Soil)

​सामान्य रूप से बागवानी के लिए दो प्रकार की भूमि का उपयोग किया जाता है:

  1. मक एवं पीट मृदा (Muck and Peat Soil):
    • मक मृदा: इसमें जीवांश पदार्थ 20% से 65% तक होता है।
    • पीट मृदा: इसमें जीवांश पदार्थ 65% से अधिक होता है।
    • ​इनकी जल धारण क्षमता अधिक होती है और ये फल वृक्षों के लिए बहुत उपयुक्त हैं।
  2. खनिज मृदा (Mineral Soil): इसमें जीवांश पदार्थ 20% से कम होता है। इसे तीन समूहों में बांटा गया है:
    • बलुई मृदा (Sandy Soil): जल निकासी तेज होती है पर नमी रोकने की क्षमता कम होती है, इसलिए यह फल उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं है।
    • मटियार मृदा (Clay Soil): इसे 'भारी मृदा' कहते हैं। इसमें हवा का संचार कम होता है, जो जड़ों की वृद्धि के लिए ठीक नहीं है।
    • दोमट मृदा (Loam Soil): यह बागवानी के लिए आदर्श एवं सबसे अच्छी भूमि है। इसमें बालू, सिल्ट और क्ले का सही मिश्रण (क्ले 20% से कम) होता है, जिससे हवा और पानी का संचार बना रहता है।

​बागवानी फसलों के लिए उचित जलवायु क्षेत्र (Climate Zones)

​फलोत्पादन पर मिट्टी से भी अधिक प्रभाव जलवायु (Climate) का पड़ता है। जलवायु के आधार पर फसलों को इन तीन मुख्य वर्गों में बांटा गया है:

जलवायु क्षेत्र

विशेषता

प्रमुख फल (Main Fruits)

शीतोष्ण (Temperate)

शीतकाल में तापमान जमाव बिंदु से नीचे रहता है।

सेब, नाशपाती, अखरोट, बादाम, चैरी

उपोष्ण (Sub-Tropical)

गर्म शुष्क गर्मियाँ और मध्यम सर्दी।

नींबू, लीची, अमरूद, अनार, अंजीर

उष्ण (Tropical)

अधिक गर्मी और आर्द्रता (नमी) वाला मौसम।

बागवानी को प्रभावित करने वाले जलवायुवीय कारक

  • तापमान (Temperature): कम तापमान से परागण (Pollination) में बाधा आती है, जबकि अधिक तापमान से फलों की मिठास बढ़ती है।
  • वर्षा (Rainfall): साल भर में लगभग 100 सेमी की समान वर्षा बागवानी के लिए उचित है।
  • आर्द्रता (Humidity): हवा में नमी का संतुलन फलों के स्वाद और गुणवत्ता के लिए जरूरी है।
  • हवा और प्रकाश: तेज हवाएं और ओला वृष्टि पौधों की शाखाओं और फलों को भारी नुकसान पहुँचाती हैं।
  • पाला और ओला: पाला आम और पपीते जैसे नाजुक पौधों को नष्ट कर सकता है।


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