खेती किसे कहते है, खेती कितने प्रकार की होती है

भारत में सर्वाधिक प्राचीन व्यवसायों में से खेती (farming in hindi) एक मुख्य व्यवसाय है ।

भारत में युगों - युगों से खेती करते हुए मानव ने खेती के प्रकार (types of farming in hindi) को विकसित किया है ।

परिस्थिति, आवश्यकता एवं मांग के अनुसार के किसी एक प्रकार का चयन करने से लिए तथा खेती (farming in hindi) किसानी को समग्र रूप में समझने के लिए खेती के सभी प्रकारों को भली - भाँति जान लेना साधारण किसान से लेकर आधुनिक कृषि वैज्ञानिक तक सभी को जान लेना अत्यन्त आवश्यक एवं लाभप्रद है ।


खेती किसे कहते है, खेती कितने प्रकार की होती है?


खेती किसे कहते है, खेती कितने प्रकार की होती है, खेती पांच प्रकार की होती है-विशिष्ट खेती, मिश्रित खेती, शुष्क खेती, बहुप्रकरिय खेती, रैंचिंग खेती आदि
खेती किसे कहते है, खेती कितने प्रकार की होती है?


खेती किसे कहते है? Definition of farming in hindi


पारिभाषिक रूप से खेती की परिभाषा (Defination of farming in hindi) से तात्पर्य प्रक्षेत्र विशेष पर कृषि व्यवसायों से धर्नाजन अनुपात तथा उत्पादन विधियों से है ।


खेती के प्रकार को विद्वानों ने निम्न प्रकार से परिभाषित किया है-


( 1 ) जोहन्सन ( Johnson ) के कथनानुसार ,

खेती (farming in hindi) एक समूह में उत्पादित फसलों और पशुओं के उत्पादन की किस्म और अनुपात में तथा उत्पादन करने में अपनायी जाने वाली विधियों और रीतियों में पूर्णरूप से समान हों, तो वह समुह खेती के प्रकार (types of farming in hindi) कहलाता है ।"


( 2 ) रॉस ( Ross ) के कथनानुसार ,

" किसी एक क्षेत्र में स्थित जब कई फार्मस के आकार, वस्तुओं के उत्पादन और उत्पादन में अपनायी जाने वाली विधियों में प्रायः समानता होती है, तो उसे खेती का प्रकार कहते हैं। "


खेती कितने प्रकार की होती है  (Types of farming in hindi )


खेती पांच प्रकार की होती है-

1. विशिष्ट खेती (Specialized Farming)
2. मिश्रित खेती  (Mixed Farming)
3. शुष्क खेती (Diversified Farming)
4. बहु प्रकारीय खेती (Dry Farming)
5. रैंचिंग खेती (Ranching Farming)


भारत में की जाने वाली खेती करने के प्रकार


वर्तमान मनुष्य के पूर्वज आदि मानव का विकास लगभग 250 हजार वर्ष पूर्व होने की परिकल्पना की गई है तथा वर्तमान मनुष्य का प्रादुर्भाव लगभग 35 हजार वर्ष पूर्व अफ्रीका में हुआ माना गया है ।


अपने सहचर जीवों की अपेक्षा मानव की प्रमुख विशेषता मस्तिष्क का विकास एवं समस्या समाधान के लिए मस्तिष्क का प्रयोग करना है ।

इसी के बलबूते अपने उद्भव काल से ही मनुष्य निरन्तर विकासमान रहा है ।


भोजन एवं अन्य शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य ने कृषि का विकास किया तथा कालान्तर में इसके अनेक स्वरूपों का प्रादुर्भाव हुआ, जिन्हें सामान्य रूप से खेती के प्रकार कहा जाता है ।


खेती के प्रकार (types of farming in hindi) खेती को सुनिश्चित करने की कार्य पद्धति ( Methodology ) है जिसके द्वारा क्षेत्र विशेष की पहचान कर परिसीमन ( Demarcation ) किया जा सकता है ।

कृषि प्रकार के निर्धारण में भौतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक आदि कारकों से होता है ।


इन कारकों के विचरकों ( Variables ) में जलवायु, उच्चावच, भूमि की उत्पादकता, भूमि सक्षमता, कृषि में मानव श्रम, कृषि में पशुशक्ति, कृषि हेतु मशीनीकरण, उर्वरक, सिंचाई, शस्य प्रतिरूप, वाणिज्यीकरण की मात्रा आदि को सम्मिलित करते हैं ।

इन्ही विचरकों के प्रभेद से कृषि - प्रकार में भिन्नता जाती है ।


खेती के प्रकारों का वर्गीकरण (Classification of farming types in hindi)


फसल व पशुधन उत्पादन आकार ( अनुपात ) एवं कृषि क्रियाओं एवं रीतियों में समरूप प्रक्षेत्रों को कृषि का एक प्रकार कहा जाता हैं ।

खेती के तरीके को कृषि योग्य भूमि में आपूर्ति, शस्य आदि कारकों के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है ।


खेती के इन प्रकारों का वर्गीकरण अनेक आधारों पर किया गया है -


सामान्य रूप से कृषि प्रकार अथवा खेती के तरीके को गहनता तथा वाणिज्यीकरण की मात्रा आदि कारकों के आधार इनका वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया गया है -


कृषि योग्य भूमि की आपूर्ति के आधार पर ( On the Basis of Supply of Cultivation )


( 1 ) गहन खेती किसे कहते है? ( Intensive farming in hindi ) -


गहन खेती (intensive farming in hindi) का प्रचलन न भागों में पाया जाता है जहाँ कृषि योग्य भूमि का विस्तार कम है एवं जनसंख्या का घनत्व अधिक में भूमि पर जनसंख्या का भार अधिक होने के कारण प्रति व्यक्ति कृषि योग्य भf बहुत कम पाई जाती है ।


गहन खेती (intensive farming in hindi) वाले प्रदेशों में गहरी जुताई, उर्वरकों की अधिक आप भरपूर सिंचाई के साधन, पूँजी, श्रम और वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से वर्ष में एक से अधिक फसले उत्पन्न की जाती हैं और प्रति हेक्टेयर अधिकाधिक उत्पादन लेने के प्रयत्न किये जाते हैं ।


अधिकाधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उत्तम बीज, शस्यावर्तन, कीट संरक्षण आदि की व्यवस्था की जाती हैं ।

इन क्षेत्रों में खेत छोटे - छोटे होते हैं तथा खाद्य फसलों के उत्पादन पर बल दिया जाता है, ताकि अधिक से अधिक जनसंख्या का भरण - पोषण हो सके ।


विश्व में ऐसे क्षेत्रों में उत्तरी - पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी - पूर्वी एशिया - चीन, भारत, जापान, कोरिया, इण्डोचीन, सुमात्रा तथा जावा के कुछ भाग इस प्रदेश में सम्मिलित हैं ।

इन भागों में जनसंख्या का घनत्व कृषि - भूमि पर संसार के अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक मिलता है ।


गहन खेती वाले ये प्रदेश बहुत प्राचीन काल से आबाद हैं और किसानों ने शताब्दियों के ।

प्रयोगों से इस गहन कृषि - पद्धति तथा भूमि उपयोग प्रतिरूप का विकास किया है ।


ये क्षेत्र नदी - घाटियों और अत्यधिक सघन जनसंख्या वाले केन्द्र हैं ।

अधिक जनसंख्या के कारण सस्त श्रमिकों की बहुतायत होती है । अतः कृषकों ने गहन कृषि (intensive farming in hindi) को अपनाया है ।


इस प्रकार का कृषि में चावल मुख्य फसल है, जो वर्ष में दो या तीन बार तक कुछ क्षेत्रों में उत्पन्न या तीन बार तक कुछ क्षेत्रों में उत्पन्न किया जाता हैं ।


( 2 ) विस्तृत खेती किसे कहते है? ( Extensive farming in hindi )


विस्तृत खेती (Extensive farming in hindi) इस प्रकार का भागों में है जहाँ भूमि की आपूर्ति पर्याप्त है तथा जनसंख्या का घनत्व अपक्षाकृत है ।


इन क्षेत्रों में कृषकों का मूल उद्देश्य होता है, बड़े - बड़े फार्मों से आ करना ।

इन विस्तृत खेती (Extensive farming in hindi) - प्रदेशों में फसलों का उत्पादन व्यापार की दृष्टि से फसलों का विशिष्टीकरण होता है ।


जहाँ विस्तृत खेती (Extensive farming in hindi) - प्रदेश में एक फसल को प्र० वहीं गहन कृषि में वर्ष में दो या तीन फसले जीवन निर्वाहन हेतु उत्पन्न कमी मशीनों से पूरी की जाती है ।


विस्तृत खेती (Extensive farming in hindi) में अधिक पूंजी का निवेश होता है ।

( स्टेपीज ), संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी तथा मध्य क्षेत्र, कनाडा के प्रेयर डाउन्स तथा अर्जेन्टाइना के पंपास में इस प्रकार की विस्तृत कृषि का प्रचलन फसल है, जो शीतकाल एवं बसन्त काल में बोया जाता है ।


अतः विस्तृत खेती (Extensive farming in hindi) भिन्न प्रकार की हैं।


इस प्रकार की कृषि का प्रचलन उन नसंख्या का घनत्व अपेक्षाकृत बहुत ही कम आता है, बड़े - बड़े फार्मों से अधिकाधिक उत्पादन प्राप्त व्यापार की दृष्टि से करते हैं ।


फर्मो पर विशेष में एक फसल को प्रधानता होती हैं, विहिन हेतु उत्पन्न की जाती है । श्रम की का निवेश होता है ।

रूस के भीतरी भाग ध्य क्षेत्र, कनाडा के प्रेयरी, आस्ट्रेलिया के विस्तृत कृषि का प्रचलन हैं गेहूँ मुख्य है ।


विस्तृत खेती तथा गहन खेती से की मात्रा के आधार पर

 

(1 ) आर्द्र कृषि किसे कहते है? ( Humid Farming in hindi ) 


आर्द्र कृषि (humid Farming in hindi) क्षेत्र वे हैं जहां 200 से०मी० अथवा के वर्षा होती है ।


इन क्षेत्रों में पौधों में नमी की आपूर्ति वर्षा से ही हो जाती है ।

धान इस कार के कृषि की प्रमुख फसल है ।

इस पद्धति में अनेक महीनों तक खेतों में पानी भरा रहता है ।कि आई क्षेत्रों में धान की तीन तीन फसले ( अमन, आस और बोरो ) प्राप्त की जाती हैं ।


पूर्वी भारत, बंगलादेश एवं श्रीलंका में खेती का यह प्रकार देखा जा सकता है ।


( 2 ) सिंचित कृषि किसे कहते है? ( Irrigated Farming in hindi ) 


सिंचित कृषि (irrigated farming in hindi) का प्रचलन उन भागो में होता है जहाँ सीमित एवं अनिश्चित वर्षा होती हैं किन्तु सिंचाई के साधन, जैसे - ननकूप, नहरें इत्यादि मौजूद हैं ।


उत्तरी भारत का मानसूनी क्षेत्र एवं अफ्रीका के उपोषण प्रदेश में यह कृषि - प्रकार प्रचलित हैं ।

भारत के अतिरिक्त चीन, अमेरिका, मिस्र, टर्की, रूस आदि देशों में सिंचित कृधि का प्रचलन अधिक रहा हैं ।


( 3 ) शुष्क खेती किसे कहते है? ( Dry Farming in hindi ) 


शुष्क खेती (dry farming in hindi) की प्राचीन पद्धति है । इसका अभिप्राय उन कृषि क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि से है जहाँ वर्षा की मात्रा 50 से०मी० से कम है तथा सिंचाई के साधनों का भी अभाव है ।


जेटजोल ( Jatzod , 1979 ) के मतानुसार इस प्रकार की कृषि जल सान्द्रण संस्कृति जल संचय संस्कृति ( Water Concentrating Culture ) पर आधारित होती हैं ।


व्यावहारिक रूप से कृषि के इस प्रकार के अंतर्गत वर्षा जल को खेतों एवं समीपवर्ती स्थानों में एकत्रित करके प्रयुक्त किया जाता है तथा साथ ही नमी संरक्षण की तकनीकों का भी अत्यधिक प्रयोग किया जाता है ।


भारत में राजस्थान, गुजरात आदि में इस प्रकार की कृषि का प्रचलन है ।

इस्राइल ने इस प्रकार की कृषि की अनेक उन्नत तकनीकों का विकास किया है , जिसमें बूंद - बूंद सिंचाई, मटका सिंचाई आदि प्रमुख हैं ।


भारत में ज्वार, बाजर , जौ, चना, सरसों शुष्क खेती (dry farming in hindi) क्षेत्र की प्रमुख फसलें हैं ।


शस्य गहनता के आधार पर वर्गीकरण ( On the Basis of Cropping Intensity )


शस्य गहनता के आधार पर खेती को निम्न तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है


( 1 ) एक फसली खेती किसे कहते है? ( Mon Cropping farming in hindi )


कृषि के इस प्रकार के अंतर्गत वर्ष में एक ही फसल का उत्पादन प्राप्त किया जाता है । विशेष रूप से यह कृषि बड़े बागानों में प्रचलित हैं ।


जैसे – मलाया एवं हिन्देशिया में रबर के बागान, ब्राजील में कहवा, क्यूबा में गन्ना तथा भारत के असम एवं दार्जीलिंग में चाय के बागानों की खेती ।


( 2 ) द्वि फसल खेती किसे कहते है? ( Double Copping farming in hindi )


कृषि के इस प्रकार के अंतर्गत वर्ष में दो भिन्न - भिन्न फसलें प्राप्त की जाती हैं ।

सामान्यतः अत्यधिक सघन आबादी क्षेत्रों में जहाँ भौगोलिक दशाएँ उपयक्त हैं, वहाँ इस प्रकार की कृषि की जाती है ।


भारत एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में नदियों द्वारा निर्मित मैदानों जैसे - गंगा यमुना के दोआब में शीत एवं ग्रीष्मकालीन ( रबी व खरीफ ) फसलें इसी प्रकार की द्वि फसली कृषि है ।


( 3 ) बहु फसली खेती किसे है? ( Multiple Cropping farming in hindi )


बहु फसली कृषि से अभिप्राय किसी भू - भाग औधक फसलें प्राप्त करने से हैं ।

इसकी संभावना वहाँ होती है जहां की दशायें त्रि के लिए अत्यधिक अनकल होती हैं ।


यह कृषि का अत्यधिक उन्नत एवं गहन प्रकार महारत क्रान्ति से बाद इस प्रकार की कृषि का प्रचलन हुआ है ।


भारत के अतिरिक्त चीन एवं अमेरिका के अनेक उन्नत कृषि क्षेत्रों में इस प्रकार की कृषि प्रचलित इसे प्रवासी कृषि ( Migratory farming in hindi ) भी कहा जाता है ।


विभिन्न है जैसे - भारत में झूम खेती या में लंदांग ( Landang ), फिलीपोन्स में कैनजीन, अमेरिका एवं रोडेशिया ( अफ्रीका ) में मिल्या जाता है ।


 इस प्रकार की कृषि में वनों को कछ वर्ष खेती farming in hindi करने के पश्चात् उस क्षेत्र किये जाते है ।

यद्यपि पर्यावरणीय चेतना के कारण ना जा रहा है किन्तु अभी भी विश्व के कुछ न है, विशेष रूप से 5 से 10° अक्षांक्षों के मध्य ( Milpe ) व से खेत तैयार दतर्गीकरण


वाणिज्यीकरण के आधार पर वर्गीकरण ( On the Basis of Commercializatio ) 


( 1 ) आदिम खेती किसे कहते है? ( Primitive Faming in hindi )


इसे प्रवासी का Cultivation, स्थानान्तरणशील खेती ( Shifting Cultivation ) देशों में भी इसे भिन्न - भिन्न नामों से जाना जाता है ।


जैसे - भारत Cultivation, मलाया एवं हिन्देशिया में लंदांग ( Land, Caingin ), श्रीलंका में चेना ( Chena ), अमेरिका एवं रोडे ( Milpa ) एवं सुडान में गासू ( Nagasu ) कहा जाता है ।


इस प्रकार का जलाकर उसकी राख से खेत तैयार किया जाता है तथा कुछ वर्ष खेती को परतो छोड़ कर दूसरे क्षेत्रों में खेत तैयार किये जाते हैं ।

यद्यपि पर्यावरणीय इस प्रकार की कृषि का प्रचलन तेजी से कम होता जा रहा है किन्तु अभी ।


भागों में इस प्रकार की खेती को देखा जा सकता है, विशेष रूप से 5० से 10 दक्षिणी अमेरिका के अमेजन बेसिन, अफ्रीका के कांगों बेसिन, दक्षिण - पूर्वी राशि द्वीप समूह के विषम उच्च भू - भागों में इसका प्रचलन बना हुआ है ।


( 2 ) व्यावसायिक खेती किसे कहते है? ( Commercial Tarining farming in hindi ) 


यह कृषि का आधुनिक प्रकार है । 

औधोगीकीकरण, यातायात के साधनों का विकास एवं वैज्ञानिक तकनीकी ज्ञान वद्धि के साथ इस कृषि का विकास हुआ है ।


इसके अंतर्गत फसल का उत्पादन उपभोग के स्थान पर बेचने के लिए किया जाता है, इसलिए सामान्यतः नगदी फसलों की खेती की जाती है ।


यह विस्तृत, गहन एवं मिश्रित सभी प्रकार की खेती का मिला - जुल रूप है ।

इसमें मानवीय श्रम के स्थान पर ट्रेक्टर, हरवेस्टर, बथ्रेसर आदि शक्ति चलित कृषि मशीनों का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है ।


विश्व में इस प्रकार की कृषि मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्द्ध में महाद्वीपों के आन्तरिक भागों एवं दक्षिणी गोलार्द्ध के तटीय भागों में प्रचलित है ।


( 3 ) रोपण खेती किसे कहते है? ( Plantation Farming in hindi )


यह भी खेती का एक आधुनिक प्रकार हैं । इसका प्रारम्भ दक्षिणी गोलार्द्ध के उष्ण एवं उपोषण प्रदेशों में हुआ तथा दक्षिणी - पूर्वी एशिया क्षत्र इसमें अग्रणीय है ।


साथ ही मध्य और दक्षिणी अमेरिका तथा पर्वी एवं पश्चिमा जान भी इसका विस्तार देखा जा सकता है ।


इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं बड़े पैमान फसल की प्रधानता , विशिष्ट कृषि पद्धति ( रोपण ) का प्रयोग आदि । 

इस कहवा, नारियल, गन्ना, केला, मसाले, कोको, रबर आदि का उत्पादन किया । 


मिश्रित खेती के आधार पर वर्गीकरण ( On the Basis of Mix Farming )


मिश्रित खेती (mixed farming in hindi) का वह प्रकार है जिसके अंतर्गत कृषि के अन्य जैसे — बागवानी, पशुपालन, वानिकी आदि को भी सम्मिलित किया जाता है ।


इसे निम्नलखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता हैं -


1. उद्यान विज्ञान एवं उसकी शाखाएं


इसके अंतर्गत खाद्यान्न फसल को भी सम्मिलित किया जाता है ।


उद्यान विज्ञान की मुख्य शाखाएं निम्नलखित है -

( i ) सब्ज़ियों की खेती ( Olericulture ) 
( ii ) पुष्यों की खेती ( Floriculture ) 
( iii ) फलो की खेती ( Gardening )
( iv ) औषधयों की खेती ( lehiculture )


इसे निम्न तीन प्रमुख तथा खाद्यान्न फसलों के साथ ही बागवानी  है ।


( i ) शाक - भाजी की खेती खेती ( Fruits Iture )
( iii ) फलो की से चरागाह कृषि ( Pastoral Farming )


2. पशुपालन ( Animal husbandary in hindi ) -


इसे चरागाह कृषि कहा जाता है । इसके अंतर्गत अनेक प्रकार के पालत एवं लाभदायक पशु अतर्गत कृषि के अन्य सहायक प्रकारों म्मलित किया जाता है । 


एवं लाभदायक पशुओं का पालन करते हुए कृषि की जाती है ।


इसके प्रमुख उप - प्रकार हैं -

( i ) गाय - भैंस पालन ( Catle Farming )
( i ) भेड़ - बकरी पालन ( Sheep - Goat Farming )
( iii ) सुअर पालन ( Pig Farming )
( iv ) मुर्गी / बत्तख / तीतर पालन ( Poultry Farming )
( v ) मधुमक्खी पालन ( Apiculture / Bee Farming )
( vi ) रेशम कीट पालन ( Sericulture )
( vii ) मत्स्य पालन ( Pisiculture ) 


3. कृषि वानिकी (Agro Forestry in hindi ) -


खेती के साथ वन्य वृक्षों को उगाना ही कृषि वानिकी है कहलाता है ।


सीताराम राव के कथनानुसार ,


कृषि वानिकी (agroforestry in hindi) वह सिद्धान्त तथा व्यवहार है जिसके द्वारा वनों की देखभाल की जाती है तथा वन से प्राप्त होने वाली वस्तुओं का उपयोग किया जाता है ।"


( i ) सामाजिक वानिकी (Social forestry in hindi)


डॉ० राना के कथनानुसार ,


“ समाज के द्वारा समाज के लिए समाज की ही भूमि पर समाज के जीवन - स्तर को सुधारने के सामाजिक उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किए जाने वाले वृक्षारोपण को सामाजिक वानिकी (social forestry in hindi) कहते हैं ।"


रोवन रैड एवं पीटर स्टीफन के कथनानुसार ,


“ कृषि वानिकी ( agro forestry in hindi ) कृषकों का अकेले अथवा भागीदार में अपने संसाधनों के सम्बन्ध में, अपनी भूमि पर वन लगाने या प्रबन्धन करने की दिशा में, किया गया संकल्प है ।"


उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि परिस्थिति, मांग, तकनीक, जलवायु आदि के आधार पर कृषि के अनेक प्रकार प्रचलित हैं ।

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