वनस्पति विज्ञान (Botany In Hindi) - अर्थ, परिभाषा एवं शाखाएं व कार्य-क्षेत्र

वनस्पति विज्ञान/बॉटनी में पौधों के विभिन्न भागों जैसे संरचना, वृद्धि एवं विकास, प्रजनन, बीमारियों, रासायनिक गुणों और विकासवादी संबधों का अध्ययन करना ही वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) कहलाता है ।

वनस्पति जगत का वर्गीकरण एवं संसार में मिलने वाले सभी पादपों (पेड़ - पौधे) का अध्ययन बॉटनी के अंतर्गत ही किया जाता है ।


वनस्पति विज्ञान के जनक? | (father of botany in hindi?)

वनस्पति विज्ञान के जनक थिओफ्रैस्टस है । इनके द्वारा ही सबसे पहले पादपों का अध्ययन किया गया था इसीलिए थिओफ्रैस्टस को वनस्पति विज्ञान के पिता के नाम से भी जाना जाता है ।


वनस्पति विज्ञान का क्या अर्थ है? | (botany meaning in hindi?)

अंग्रेजी के शब्द science की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द scire से हुई है जिसका अर्थ होता है जानना ।

इसी शब्द से मिलता - जुलता दूसरा शब्द scientia है जिसका अर्थ है ज्ञान ।

हिंदी भाषा की दृष्टि से विज्ञान, विज्ञ से बनाया गया है, जिसका अर्थ है ज्ञानवान् ।

वनस्पति विज्ञान का अर्थ (botany hindi meaning) - सभी प्राकृतिक शक्तियाँ, वस्तुयें अथवा वह सब कुछ जो हम देख सकते हैं अथवा अनुभव कर सकते हैं, बॉटनी का विषय हो सकता है ।


वनस्पति विज्ञान/बॉटनी क्या है? | (botany kya hai?)

जैसे-जैसे मनुष्य में बुद्धि विकसित होती गई उसने अपने आस - पास की वस्तुओं, घटनाओ, चमत्कारों के रहस्यों की खोज की तथा उनके बारे में ज्ञान प्राप्त किया ।

इस प्रकार प्राप्त ज्ञान को क्रमबद्ध कर, निरीक्षण व परीक्षण द्वारा निश्चित सिद्धान्त में बदलाना ऐसा ज्ञान वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) कहलाता है ।


वनस्पति विज्ञान की परिभाषा? | (definition of botany in hindi?)

वनस्पति विज्ञान विज्ञान की एक शाखा है जिसके अंतर्गत संसार की सभी वनस्पतियों का अध्ययन वैज्ञानिक ढंग से किया जाता है ।

वनस्पति विज्ञान की परिभाषा - "विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत पादपों (वनस्पतियों) का अध्ययन किया जाता है वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) कहलाता है।"

"The branch of science under which plants are studied is called botany."


वनस्पति विज्ञान किसे कहते है एवं वनस्पति विज्ञान की कितनी शाखाएं होती है?

प्रकृति की बात करें तो संसार में जीवित और निर्जीव दो ही प्रकार की वस्तुयें मिलती हैं ।

निर्जीव वस्तुओं तथा अनेक प्रकार की प्राकृतिक शक्तियों आदि के वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अनेक हो सकते हैं इनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, भू - विज्ञान एवं खगोल विज्ञान आदि सम्मिलित होते हैं ।

वर्तमान में तो बॉटनी के अतिरिक्त सामाजिक विज्ञानो जैसे नागरिक शास्त्र, आदि तथा अमूर्त विज्ञान जैसे गणित आदि भी विज्ञान की श्रेणी में माने जाने लगे हैं ।

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वनस्पति विज्ञान (Botany In Hindi) - अर्थ, परिभाषा एवं शाखाएं व कार्य-क्षेत्र 

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वनस्पति विज्ञान की कितनी शाखाएं होती है? | (branches of botany in hindi?)


वनस्पति विज्ञान की प्रमुख शाखाओं के नाम -

1. शुद्ध या मौलिक वनस्पति विज्ञान -

  • आकारिकी (morphology)
  • शरीर - क्रियाविज्ञान (physiology)
  • पारिस्थितिकी  (ecology)
  • वर्गिकी या वर्गीकरण वनस्पति विज्ञान (taxonomy or systemic botany)
  • पादप जीवाश्मिकी (palaeobotany)
  • पादप भूगोल (plant geography)
  • भ्रौणिकी (embryology)
  • पादप आनुवंशिकी (plant genetics)

2. व्यावहारिक या अनुप्रयुक्त वनस्पति विज्ञान -

  • कृषि वनस्पति विज्ञान (agriculture botany)
  • पादप रोग विज्ञान (plant pathology)
  • उद्यान विज्ञान (horticulture in hindi)
  • भेषज विज्ञान (pharmocognosy)
  • वन विद्या या वनवर्धन (forestry or silviculture)
  • मृदा विज्ञान (pedology)
  • पादप आनुवंशिकी (plant genetics)


वनस्पति विज्ञान की शाखाएं स्पष्ट कीजिए?

वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) की शाखाओं को दो भागों में बांटा गया है जो निम्नलिखित है -


1. शुद्ध या मौलिक वनस्पति विज्ञान

वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) की वह शाखा है जिसमें पौधों का प्राकृतिक रूप से अध्ययन किया जाता है ।


शुद्ध या मौलिक वनस्पति विज्ञान की शाखाएं है -

( i ) आकारिकी (morphology) -

वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) की वह शाखा है, जिसके अन्तर्गत पौधों तथा उनके विभिन्न भागों की बाह्य संरचना तथा आकृति का अध्ययन करते हैं ।

आकारिकी को दो उपविभाग में बांटा गया है -

  • बाह्य आकारिकी
  • आन्तरिक आकारिकी

( अ ) बाह्य आकारिकी - इसमें पौधों तथा उनके विभिन्न अंगों का बाहर से निरीक्षण किया जाता है ।

जैसे - जड़, तना, पत्ती, पुष्प, फल तथा बीज की रूपरेखा, उनकी बाह्य संरचना, आकृति आदि का अध्ययन तथा इन अगों का दूसरे पोधों के उन्हीं अंगों के साथ तुलनात्मक अध्ययन ।

( ब ) आन्तरिक आकारिकी - इसमें पौधों के अंगों की भीतरी संरचना का अध्ययन किया जाता है ।

आन्तरिक आकारिकी पुनः तीन भाग है -

  • शारीरिकी
  • औतिकी
  • कोशिका विज्ञान


( क ) शारीरिकी

इसमें केवल नग्न नेत्रों (naked eyes) द्वारा, पौधों के भागों की आन्तरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है ।

( ख ) औतिकी

इसमें सूक्ष्मदर्शी (micro - scope) की सहायता से पौधों की आन्तरिक संरचना अथवा ऊतकों तथा ऊतक तन्त्रों (tissues and tissue systems) का अध्ययन किया जाता है ।

( घ ) कोशिका विज्ञान

इसमें कोशिका (cell) और उसके अन्दर पाये जाने वाले सजीव व निर्जीव अन्तर्वेशनों ( living and non - living inclusions );

जैसे - माइटोकॉण्डिया, हरितलवक, राइबोसोम्स, गॉल्जीकाय, केन्द्रक तथा जीवद्रव्य में उपस्थित अन्य अन्तर्वेशनों की विस्तृत संरचना आदि का अध्ययन किया जाता है ।


( ii ) शरीर - क्रियाविज्ञान (physiology) -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत पौधों तथा उनके विभिन्न अंगों की विभिन्न जीवन सम्बन्धी क्रियाओं का अध्ययन करते हैं ।

जैसे - पोषण (nutrition), श्वसन (respiration), उपापचय ( metabolism ), गति (movement), वृद्धि (growth), जनन (reproduction) आदि क्रियाओं का ज्ञान प्राप्त करते हैं ।


( iii ) पारिस्थितिकी  (ecology) -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत पौधों तथा उनके वातावरण (environment) के सम्बन्ध में ज्ञान प्राप्त करते हैं ।

इस सन्दर्भ में पौधों में अनुकूलन, बनावट आदि में परिवर्तन, मृदा के साथ पौधों के सम्बन आदि का अध्ययनकरते हैं ।


( iv ) वर्गिकी या वर्गीकरण वनस्पति विज्ञान (taxonomy or systemic botany) -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा विभिन्न लक्षणों की विभिन्नताओं तथा समानताओं के आधार पर उनके समह (grouns or taxa) बनाकर उनका वर्गीकरण किया जाता है ।

इस प्रकार इन पौधों का अध्ययन कम समय तथा व्यवस्थित ढंग से हो जाता है । पौधों का नामकरण (nomenclature) भी इस शाखा के अन्तर्गत ही किया जाता है ।


( v ) पादप भूगोल (plant geography) -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा में पौधों का भूमि पर वितरण, तथा इस वितरण के लिए जो कारक (factors) उत्तरदायी होते हैं, उनका ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


( vi ) पादप जीवाश्मिकी (palaeobotany) - -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा में प्राचीन काल के पौधों को जो अब विलुप्त हो चुके है और जिनके जीवाश्म (fossils) ही मिलते है, ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


( vii ) भ्रौणिकी (embryology) -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत अण्ड के निषेचन (fertilization) से लेकर भ्रूण तथा उसके परिवर्द्धन का अध्ययन किया जाता है ।


( viii ) पादप आनुवंशिकी (plant genetics) -

वनस्पति विज्ञान की इस शाखा के अन्तर्गत पौधों के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में बंशागत लक्षणों का अध्ययन किया जाता है ।


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2. व्यावहारिक वनस्पति विज्ञान की शाखायें


वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) की वह शाखा जिसमें पौधों का अध्ययन मानव जाति की भलाई तथा उन्नति के लिए करते हैं और मौलिक वनस्पति विज्ञान व्यावहारिक वनस्पति विज्ञान का आधार है।

अत: पहले मौलिक (शुद्ध) वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) का अध्ययन ही किया जाना आवश्यक होता है ।

वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) की इस शाखा के अन्तर्गत, मनुष्य की उन्नति तथा भलाई के लिए, पौधों का अध्ययन किया जाता है ।


व्यावहारिक वनस्पति विज्ञान को निम्न उपशाखाओं में बाँटा गया है -

( i ) कृषि विज्ञान (agriculture botany) -

वह विज्ञान है, जिसमें कृषि के लिए फसलो (crops) के उगाने आदि का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


( ii ) उद्यान विज्ञान (horticulture) -

इस शाखा में पुष्पों, फलों तथा शाकभाजी (vegetables) उगाने के लिए उद्यान पादपों के उगाने का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।

बोनसाई (bonsai - bon = पौधा; sai=गमला) जापान के उद्यान कृषकों ने छोटे - छोटे फलों वाले वृक्षों को, गमलों में, छोटे आकार के पौधों में उगाकर एक चमत्कारी कार्य किया है ।

अब संसार के अनेक देशो मे अनार, नींबू, सन्तरा, चीड़ (Pinus longifolia) आदि के छोटे - छोटे पौधे गमलो में उगाये जाते हैं । यह एक रोचक व लाभकारी कार्य है ।


( iii ) पादप रोग विज्ञान (plant pathology) - विज्ञान (plant pathology) -

इस शाखा में पादप रोगों, उनके उपचार तथा रोकथाम आदि का ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


( iv ) भेषज विज्ञान (pharmocognosy) -

इसमें औषधि में काम वाले पौधो अर्थात् औषधीय पौधों (medicinal plants) के बारे में ज्ञान प्राप्त किया जाता है ।


( v ) वन विद्या या वनवर्धन (forestry or silviculture) -

इसमें वनो से वृक्षों की लकड़ी प्राप्त करने आदि हेत अध्ययन किया जाता है ।


( vi ) मृदा विज्ञान (pedology) -

भूमि (soil) अर्थात् मृदा के अध्ययन को कहते हैं ।


( vii ) पादप आनुवंशिकी (plant genetics) -

इसमें पौधो की आनुवंशिकता (heredity) तथा विभिन्नताओं (variations) का अध्ययन किया जाता है ।

आजकल तो अनेक नई और महत्वपूर्ण शाखायें पनपने लगी है । जो किसी एक विशेष और अध्ययन करके वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) किसान को और अधिक समृद्ध करने क साथ - साथ इसका क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत करती जा रही है ।


वनस्पति विज्ञान का महत्व एवं उद्देश्य लिखिए? Impotance of botany in hindi 

वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) के अध्ययन का प्रमुख उद्देश्य है पौधों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करना ।

पौधे हमारे लिए अत्यधिक महत्वूर्ण व लाभदायक होते है ।

वास्तव में, पौधों के बिना (विशेषकर हरे पौधो के) तो जीवन ही असम्भव दिखाई देता है ।

आपको ज्ञात होगा कि पृथ्वी के लिए सूर्य ही समस्त ऊर्जा का स्थायी स्रोत है जिसके प्रकाश की ऊर्जा को ग्रहण कर हरे पौधे भोजन का निर्माण तो करते ही हैं जन्तुओ को श्वसन के लिए ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराते हैं ।


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वनस्पतियों का महत्व एवं वनस्पति विज्ञान के उद्देश्य निम्नलिखित प्रकार से है -


1. वनस्पति (पेड़ - पौधे) भोजन का साधन होते है -

जैसा ऊपर बताया गया है, हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा प्राप्त करके भोजन निर्मित करते है, अर्थात् उत्पादक हैं ।

इसका कुछ भाग तो पौधों के ही काम आ जाता है किन्तु शेष भाग जन्तुओं के भोजन के रूप में काम आता है ।

ध्यान रहे, शाकाहारी जन्तु तो पौधों से सोधे, किन्तु मांसाहारी जन्तु शाकाहारी जन्तुओं के मांस से भोजन प्राप्त करते हैं ।


2. वनस्पतियां वायु शुद्ध करते है -

वातावरण में जीवों के श्वसन द्वारा, आग के जलने आदि अनेक क्रियाओं के कारण वायु में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा बढ़ती रहती है ।

पौधे कार्बन डाइऑक्साइड लेकर उससे भोजन निर्माण करते हैं तथा बदले में वायु को ऑक्सीजन देते रहते हैं ।

इस प्रकार, वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा नहीं बढ़ने पाती और भऑक्सीजन की कमी भी पूरी होती रहती है, अर्थात् वायु शुद्ध रहती है ।


3. वनस्पतियों से इंधन प्राप्त होता है -

लगभग सभी प्रकार के ईंधन; जैसे - लकड़ी, कोयला, तेल, पेट्रोल आदि पौधों की देन हैं ।


4. पौधों से रेशे तथा वस्त्र प्राप्त होते है -

पौधों से अनेक प्रकार के रेशे प्राप्त होते है, जिनसे अनेक प्रकार की वस्तुये बनायी जाती हैं ।

पटसन, सन, नारियल, जूट आदि के रेशे प्राप्त कर रस्सी, सुतलियाँ तथा अन्य प्रकार की वस्तुयें बनायी जाती हैं ।

कपास से रेशे (रुई) प्राप्त कर धागा तथा धागे से कपड़ा बनाया जाता है ।


5. इमारती लकड़ी तथा अन्य उपयोगी काष्ठ -

पौधे हमें सभी प्रकार की उपयोगी लकड़ी प्राप्त कराते हैं ।

मकान आदि के लिए इमारती लकड़ी, फनींचर आदि के लिए उपयोगी लकड़ी तथा कागज बनाने के लिए लुगदी भी लकड़ी से ही प्राप्त की जाती है ।


6. पौधों से औषधियाँ प्राप्त होती है -

अनेक प्रकार के पौधों के अंगों से अनेक प्रकार की औषधि प्राप्त की जाती है ।

जैसे - कुनीन , पौधे की छाल से प्राप्त होती है, आदि ।

आजकल अनेक असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए बहुप्रचलित एण्टीबायोटिक्स (प्रतिजैव) कई प्रकार की फफूंदों से प्राप्त होते हैं -

उदाहरण - पैनिसिलिन, से से आदि ।


7. पौधों से प्राप्त अन्य उत्पाद –

अनेक प्रकार के तेल, गोंद, रेजिन (resin), रबड़ (rubber) आदि पदार्थ पौधों से ही प्राप्त होते हैं तथा इनसे सम्बन्धित अनेक महत्त्वपूर्ण उद्योगों में करोड़ों लोग लगे हुए हैं ।


8. पौधे भूमि के संरक्षक हैं -

पौधों की जड़ें भूमि में मिट्टी के कणों को बाँधकर रखती है ।

अत: मिट्टी का क्षय नहीं होने पाता । इनके होने से भूमि की जल - संचय शक्ति भी बढ़ती है।


9. पौधों के अन्य उपयोग -

मृत पौधों के सभी भाग मिट्टी के साथ मिलकर उपजाऊ ह्यूमस (humus) बनाते हैं ।

अनेक कवक व जीवाणु इन कार्बनिक पदार्थों को अपघटित करके अनेक प्राकृतिक चक्रों को पूरा करने में सहयोग करते हैं ।

जिससे विभिन्न प्रकार की गैसों व अन्य पदार्थों का प्रकृति में सन्तुलन बना रहता है ।

कुछ जीवाणु तथा अन्य पौधे तो भूमि में नाइट्रेट आदि की मात्रा बढ़ाकर भूमि को उपजाऊ बनाते हैं । इसके अतिरिक्त यीस्ट (yeast) से एल्कोहॉल आदि बनता है ।


10. पौधे मनोरंजन का साधन -

संसार भर में पौधे प्राकतिक सन्दरता को बढ़ाने का सर्वोत्तम साधन हैं ।

वैसे भी मनोरंजन तथा प्रसन्न रहने के लिए पौधों या उसके अंगों को विभिन्न प्रकार से प्रयोग में लाया जाता रहा है ।

कवियों, कलाकारों आदि को कृतियों में पौधों, पुष्पों आदि का विशिष्ट स्थान रहा है । छपाई के नमूनों, चित्रकारी के नमूनों आदि के लिए पौधे विशिष्ट प्रेरणा स्रोत माने जाते हैं ।


11. दूसरी ओर प्राणियों तथा पौधों के मल - 

मूत्र, मृत शरीरों व मृत अंगों पर अनेक कवक (fungi) व जीवाणु (bacteria) अपघटनकारी क्रियायें (decomposing activities) करके विभिन्न आधारभूत पदार्थों को अलग करते हैं ।

इन्हीं से कच्चे पदार्थों के रूप में पौधों को नाइट्रेट, फॉस्फेट आदि तत्त्व मिलते हैं । इस प्रकार प्रकृति में विभिन्न पदार्थों के चक्र चलते रहते हैं ।

इसी से संसार में जैवीय सन्तुलन (biotic balance) बना रहता है । इन चक्रों को भू - जैवीय रासायनिक चक्र (bio-geo chemical cycles) कहते हैं ।

उपर्युक्त लाभों को ध्यान में रखते हुए, सम्मिलित रूप में तथा सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि पौधे जीवमण्डल (biosphere) को सन्तुलित रखने में अति महत्त्वपूर्ण कारक के रूप में भूमिका निभाते हैं ।

एक ओर हरे पौधे दूषित वातावरण को शुद्ध करते हैं अर्थात् पर्यावरण की कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) लेकर तथा ऑक्सीजन (O) बाहर छोड़कर पयावरण को शुद्ध करते हैं ।

सभी जीवधारी इसी ऑक्सीजन के लिए इन्हीं हरे पौधों पर निर्भर करते हैं । इसी से इन जीवधारियों का सांस लेना तथा जीना सम्भव हो पाता है ।


वनस्पति विज्ञान का कार्य-क्षेत्र? | (scope of botany in hindi?)

वनस्पति विज्ञान का क्षेत्र (scope of botany in hindi) विभिन्न शाखाये पौधो के बारे में अधिकाधिक ज्ञान की वृद्धि करके इस वनस्पति विज्ञान के क्षेत्रको जा रही है ।

पौधों को जनन क्रिया, विकास तथा आर्थिक महत्त्व का अध्ययन भी तो इसी विज्ञान के से छोटे पौधे से लेकर बड़े से बड़े वृक्ष के विभिन्न समूहों तथा अलग - अलग पौधों का अधिकाधिक विस्तृत करती जा रही है ।

पौधों की जान के अन्तर्गत किया जाता है । छोटे से छोटे पौधे से लेकर अध्ययन विभिन्न शाखाओं में किया जाता है; जैसे - शैवाल (algae), कवक (fungi), जीवाणु (bacteria), वाइरस (virus) आदि के अध्ययन के लिए क्रमश: फाइकोलोजी (phycology), माइकोलोजी (mycology), बैक्टेरिओलोजी (bacteriology), वाइरोलोजी (virology) आदि तथा आर्थिक वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) आदि।


वनस्पति विज्ञान का क्षेत्र (scope of botany in hindi) बढ़ाने के साथ - साथ इसे अत्यधिक महत्त्वपूर्ण बना दिया है ।

इसका कारण यह है, कि प्रयोग में आने वाली ये शाखायें सामान्य जन - जीवन के लिए आवश्यक होती हैं ।

ये सब शाखायें प्रमुख रूप से अनुप्रयुक्त वनस्पति विज्ञान (botany in hindi) बनाने में सहायता करती हैं ।

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं, विगत कुछ वर्षों में जीवविज्ञान सम्बन्धी विषयों में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए है ।

फलस्वरूप सूक्ष्मतम संरचना और कार्य को समझने - समझाने के लिए कुछ अलग ही शाखाओं ने जन्म ले लिया है और वे विकास के पथ पर अग्रसर होती जा रही हैं ।

इनमें से सूक्ष्म जीवविज्ञान या सूक्ष्मजैविकी (microbiology), जैव रसायन विज्ञान (biochemistry), जैवभौतिकी (biophysics), अणु जीवविज्ञान (molecular biology) आदि अनेक स्वतन्त्र विषय चुने जा चुके हैं ।

इधर, पौधे मनुष्य जीवन के लिए तो क्या किसी भी जीवन के लिए परमावश्यक हैं । रोटी, कपड़ा और मकान की सभी समस्यायें अब तक वनस्पतियों ने ही पूरी की हैं ।

अतिरिक्त आवश्यक से आवश्यक और आरामदेह वस्तुओं इत्यादि के लिए भी तो मनुष्य को पूर्ण रूप से वनस्पतियों पर ही निर्भर रहना पड़ता है ।

आयुर्वेद के आधार पर पौधों से प्राप्त चमत्कारिक औषधियों तथा कवकों व जीवाणुओं से प्राप्त प्रतिजैविक पदार्थों (antibiotics) के कारण तो वनस्पतियों का क्षेत्र चिकित्सा विज्ञान में नये सिरे से व्यापक होता जा रहा है ।

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