अनिषेक फलन ( Parthenocarpy in Hindi )

अनिषेक फलन किसे कहते है यह कितने प्रकार का होता है एवं इसके क्या कारण है, उदहारण सहित समझाए?


अनिषेक फलन ( Parthenocarpy in Hindi )
अनिषेक फलन ( Parthenocarpy in Hindi )


अनिषेक फलन किसे कहते है? Parthenocarpy in hindi


अनिषेक फलित फल प्राय: बीज रहित होते हैं, लेकिन हमेशा नहीं, इसी प्रकार बीज रहित फल हमेशा अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) नहीं होते हैं ।

कुछ फलों, जैसे - स्ट्रॉबैरी की कुछ प्रजातियों में जीवित बीज पाये जाते हैं । यद्यपि उनमें निषेचन नहीं होता है ।

ये फल अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) तथा निषेक जनित होते हैं । बहुत से पौधों में बीज रहित फल अनिषेक फलित नहीं होते बल्कि उनमें निषेचन के उपरान्त भ्रूण के नष्ट होने से यह परिस्थिति पैदा होती है ।

इस प्रकार से अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) व बीज रहित फल होना पृथक रूप से दो घटनायें होती हैं ।

अनिषेक फलन लगभग सभी जातियों व प्रजातियों में कभी - कभी पाया जाता है ।

अनिषेक फलन की पारिभाषा? Definition of Parthenocarpy in Hindi


"जब फल बिना निषेचन के बन जाते हैं, तो इसको अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) कहते हैं।"

"Parthenocarpy is defined as the formation of fruits without fertilization."

"To explain further parthenocarpy refer's to the ability of the plant to develope its fruits without fertilization."

इन्हे भी देखें


अनिषेक फलन कितने प्रकार होता है? Types of Parthenocarpy in Hindi


अनिषेक फलन के प्रकार


1. प्राकृतिक अनिषेक फलन (Natural Parthenocarpy in hindi)


यह विभिन्न तरीकों द्वारा पैदा होती है । यह बन्ध्यता (Sterility) लगातार वानस्पतिक तरीके (Vegetative methods ) प्रयोग करने से पैदा हो जाती है ।

जैसे - कि केले में कुछ अवसर पर अनिषेक फलत पैदा करने के लिए थोडी मदद सामग्री की आवश्यकता होती है ।

Cheema तथा Dani ( 1929 ) के अनुसार, पपीते में मादा पौधे के फूलों को जब कागज अथवा कपड़े के थैले में बन्द कर दिया जाता है तो अनिषेक जनित (Parthenocarpic) फल पैदा होते हैं ।

हालांकि फलों का आकार प्राकृतिक रूप से पैदा हए फलों से छोटा होता है । अगर फूल द्विलिंगी होता है तो फूलों को बन्द करने से पहले नर भाग हटाना आवश्यक होता है ।

2. प्रेरित अनिषेक फलन (Induced Parthenocarpy in hindi)


फल के विकास में जितनी 'ऑक्जिन' की आवश्यकता होती है वह निसेचित अंडकोष से भेजी जाती है ।

लेकिन बहुत से ऐसे कारक हैं जो अंडाशय में 'ऑक्जिन' की मात्रा को प्रभावित करते हैं, जो निम्नलिखित हैं -

( i ) High Temperature -


नाशपाती में उच्च तापक्रम होने से बीज रहित फल पैदा होते हैं ।

इसकी कुछ जातियों की समूची फलत बीज रहित पैदा होती है जब उनको कैलिफोर्निया तथा दक्षिणी अफ्रीका में पैदा किया जाता है ।

( ii ) Frost -


लेविस ( Lewis ) ने बताता है कि जब नाशपाती की 'Conference' तथा 'Fertility' प्रजातियों को 5°C तापक्रम पर 18 घण्टे के लिए एक्सपोज किया जाता है तो अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) दशा पैदा की जा सकती है ।

( iii ) Insect Attack -


कीट आक्रमण के कारण सेब की बहत सी प्रजातियाँ छोटे बीज रहित फल पैदा करती हैं ।

बहुत से वैज्ञानिकों ने बतलाया कि 'एफिड्स' इन्डोल एसिटिक एसिड ( IAA ) पौधे के उन भागों में प्रविष्ट कर देते हैं, जहाँ पर वे आक्रमण करते हैं ।

( iv ) Bark Ringing -


Muller ( 1908 ) ने 'गूज वैरी' में छाल वलयन करके अनिषेक फलन दशा पैदा करके सार्थकता प्राप्त की । इसी प्रकार बीज रहित अगर तथा सेब पैदा किये जा सकते हैं ।

( v ) Mechanical Stimulus -


( a ) Mechanical Irritation of Stigma -  Darwin( 1844 ) ने बताया कि वर्तिकाय ( Stigma ) को यांत्रिक क्षति पहुँचाकर अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) फल प्राप्त किये जा सकते हैं ।

Tartarinest ( 1929 ) ने वर्तिकाय ( Stigma ) को टमाटर के फूलों में बुस तथा चिमटी से रगड़ कर अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) फल प्राप्त किये ।

( b ) Removal of Style - Yussuda ( 1930 to 1939 ) ने इस पद्धति को बैंगन में प्रयोग करके बीज रहित फल पैदा किये । इसने पराग नलिका के अंडाशय तक पहुँचने से पहले ही वर्तिका (Style) को आधार से काट दिया ।

(Sokolyshaya) ( 1940 ) ने नींबू की जातियों में इस पद्धति को प्रयोग करके अच्छे किस्म के बीज रहित फल पैदा किये ।

3. बिना निषेचन के परागण (Pollination Without Fertilization)


Millardent ( 1901 ) द्वारा यूरोपियन अंगूर में एम्पेलोप्सिस (Ampelopsis) का पराग प्रयोग करके बीज रहित फल पैदा किये गये ।

Mossart ( 1902 ) ने कुछ आरकिड में देखा कि वर्तिकाग्र (Stigma) पर मरा हु पर मरा हआ पराग (Pollen) रखने से अंडाशय में मामूली सी वटि पराग का स्राव प्रयोग करके उपुर्यक्त प्रकार Fitting ( 1909 , 10 ) ने भी दोनों मरे तथा जीवित प मे ही नतीजे प्राप्त किये ।

4. रसायन के अनुप्रयोग द्वारा  (By Application of Chemicals)


constafson ( 1936 ) ने प्रयोग द्वारा दिखाया कि बीज रहित फल पैदा करने के लिए मन का प्रयोग किया जा सकता है । उसने एक खास रसायन फूलों का प्रयोग करके बिना सेचन किये बीज रहित फल प्राप्त किये ।

गस्टैफशन द्वारा इन्डोल एसिटिक एसिड ( IAA ), इन्डोल प्रोपाइनिक एसिड ( IPA ), इन्डोल बटारिक एसिड ( IBA ) तथा फिनायल एसिटिक एसिड ( PAA ) प्रयोग किया गया ।

ये हारमोन फल खिलने के तुरन्त बाद सेचन से पहले प्रयोग किये गये ।

Singh and Kacker ( 1952 ) ने टमाटर में IBA, IAA तथा NAA लिनोलिन पेस्ट में प्रयोग करके बीज रहित फल प्राप्त किये ।

कृत्रिम अनिषेक फलन द्वारा जो फल पैदा किये जाते हैं, वे बीज रहित ही होते हैं ।

इस विधि द्वारा बहुत से फलों को बीज रहित बनाया गया है।
जैसे - टमाटर, स्ट्रॉबैरी, मिर्च, बैंगन, कद्दू वर्गीय फल इत्यादि ।

अनिषेक फलन फलों के गुण एवं उनके उदाहरण 


( 1 ) बनावट ( Form ) -


अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) में फल की आंतरिक संरचना में कुछ बदलाव आ जाता है, जो फल की बनावट को प्रभावित करता है ।

Munson ( 1898 ) ने देखा कि इंग्लिश कुकम्बर ( English cucumber ) के अनिषेक फलित बीज रहित फल बेलनाकार (Cylindrical) आकृति के पैदा हुए और जब उनको सेचित करके उत्पन्न किया गया तो प्रत्येक फल का अगला 1 / 3 हिस्सा अधिक लम्बा पैदा हआ तथा उस हिस्से में सभी बीज भी पाये गये ।

जापानी परसीमोन के बीज रहित फल नुकीली आकृति के पैदा हुये जब कि बीज वाले फल अंडाकार पाये गये । बहुत से फलों जैसे केले की आकृति में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।

( 2 ) आकार ( Size ) -


बीज का प्रभाव फल के आकार पर अधिक पड़ता है । ऐसा देखा गया है कि अंगूर की एक ही जाति में बीज रहित अंगूर, बीज वाले अंगूर की तुलना में छोटा पाया जाता है ।

Ewert ( 1910 ) ने बतलाया कि गजबैरी के बीज वाले फल औसतन 5 ग्राम के पाये गये जबकि बीज रहित फल केवल 3 ग्राम के । बीज रहित सेब तथा नाशपाती के फल अधिकतर बीज वाले फर्लो से छोटे होते हैं ।

Singh and Kacker ( 1952 ) ने पाया कि बाजा रहित टमाटर का औसतन भार 27 ग्राम था जबकि बीज वाले टमाटर का 45 ग्राम

टिन्डा ( Citrullus Vulgaris var fistuosus ) में Konhor ( 1958 ) ने पाया कि NAA के छड़काव से अनिषेक फलित फलों का आकार पर कोई प्रभाव नहीं पडा जबकि IBA ने आम के फलों का आकार छोटा हो गया ।

Heinicke ( 1917 ) ने बतलाया कि फर विकास के समय उनमें पानी तथा सत्व ( Sap ) को खींचने की अधिक शक्ति होता है ।

Inicke ( 1917 ) ने बतलाया कि फलों में बीजों के फल बड़े आकार एवं अधिक भार वाले पैदा होते हैं । रहित तथा बीज वाले फलों की बनावट प्रदर्शित करती है ।

( 3 ) बनावट तथा किस्म ( Composition and Quality )


नाशपाती के बीज रहित तथा बीज वाले फलों के अन्दर खटास में काफी अन्तर पाया जाता है, जिससे उनकी किस्म में अन्तर आ जाता है ।

काकी ( Japanese persimon ) की कुछ जातियों के बीज रहित तथा बीज वाले फलों की बनावट तथा किस्म में काफी अन्तर पाया जाता है।

Hume ( 1913 ) ने बताया कि Zangi Hyakume इत्यादि हमेशा ठोस, गहरे गूदे वाले होते हैं जबकि उनमें ठीक प्रकार से वितरित 3 - 4 बीज पाये जाते हैं ।

जब इनमें 1, 2 अथवा 3 बीज होते हैं तो बीज के चारों तरफ गहरा गूदा लेकिन कुछ दूरी पर गूदा हल्के रंग का पाया जाता है तथा इन प्रजातियों के बीज रहित फलों में गूदा हल्के रंग का पाया जाता है ।

गहरे गूदे वाले परसीमोन खाने योग्य एवं कड़े होते हैं जबकि हल्के गूदे वाले फल खाने योग्य नहीं होते हैं जब तक कि वे मुलायम न पड़ जायें ।

Singh and Kacker ( 1952 ) ने ज्ञात किया कि बीज रहित टमाटर , बीज वालों की तुलना में अन्दर से अधिक ठोस थे तथा उनका घनत्व (Density) अपेक्षा कति अधिक था ।

अंगूर में बीज रहित फल बीज वाले फलों की तुलना में अधिक मीठे पाये जाते हैं ।

( 4 ) पकने का समय ( Season of Maturity )


एक ही जाति में बीज रहित तथा बीज वाले फलों में फल बनने से उनके पकने के मध्य काफी अन्तर पाया जाता है । बीज रहित फल पकने तक अधिक समय लेते हैं अपेक्षाकृत बीज वाले फलों के ।

Kacker ( 1952 ) ने बतलाया कि बीज रहित टमाटर जो पेस्ट हारमोन की सहायता से पैदा किये गये, बीज वाले टमाटरों की तुलना में एक सप्ताह पहले ही पक गये ।

अनिषेक फलन या बीज रहित फलों का मूल्य


खाने योग्य फलों से बीज रहित दशा व्यवसायिक कायों के लिए काफी महत्त्वपूर्ण समझी जाती है ।

बीज रहित अंगूर, नारंगी, केला, अनन्नास, तरबूज इत्यादि में अधिक कीमत मिलती है । दूसरी तरफ बहुत से फलों जैसे - सेब, नाशपाती, चैरी, अलूचा में इसको अधिक महत्त्व नहीं दिया जाता है ।

फल उत्पादन कर्ताओं के लिए अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) अधिक महत्त्व रखती है क्योंकि स्वयं एवं परसेचन असफल हो जाने पर भी फल बनते हैं तथा वे ठीक प्रकार से पकते भी हैं ।

भारत वर्ष में बहुत से फल तथा सब्जियाँ ऐसी हैं जिनमें अनिषेक फलित फल पैदा करके उनका अधिक स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।

जैसे - अंगर, अमरूद, टिन्डा, लौकी, करेला, चिचिन्डा, बैगन, टमाटर इत्यादि ।

दूसरी ओर यह हानिकारक भी है क्योंकि सभी फल बीज रहित हो जाने पर अभिजनन द्वारा सुधार असम्भव है ।

साथ ही साथ बहुत से फलों जैसे - नारियल, सुपारी, काजू, बादाम, राट इत्यादि जिनके बीज ही खाये जाते हैं, में अनिषेक फलन (Parthenocarpy in hindi) हानिकारक सिद्ध होगा ।

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