पादप जगत का आधुनिक वर्गीकरण: ओसवाल्ड टिप्पो (1942) का विस्तृत चार्ट

पादप जगत का आधुनिक वर्गीकरण
पादप जगत का आधुनिक वर्गीकरण


वनस्पति जगत का आधुनिक वर्गीकरण (Modern Classification of Flora)

​पादप जगत के व्यवस्थित अध्ययन के लिए ओसवाल्ड टिप्पो (Oswald Tippo) ने 1942 में एक विस्तृत वर्गीकरण प्रस्तुत किया। यह वर्गीकरण पौधों के संरचनात्मक विकास, भ्रूण की उपस्थिति और संवहन ऊतकों (Vascular Tissues) के आधार पर तैयार किया गया है। टिप्पो के अनुसार, सम्पूर्ण पादप जगत को दो मुख्य उपजगतों (Sub-kingdoms) में विभाजित किया गया है।

1. उपजगत: थैलोफाइटा (Sub-kingdom: Thallophyta)

​थैलोफाइटा के अंतर्गत वे सरल पौधे आते हैं जिनका शरीर जड़, तना और पत्तियों में विभाजित नहीं होता। इसे सूकायकी (Thalloid) शरीर कहा जाता है।

प्रमुख लक्षण:

  • ​ये एककोशिकीय से लेकर विशाल बहुकोशिकीय तक हो सकते हैं।
  • ​इनमें भ्रूण (Embryo) का निर्माण नहीं होता; युग्मनज (Zygote) सीधे पौधे को जन्म देता है।
  • ​अलैंगिक जनन प्रायः चलबीजाणुओं (Zoospores) द्वारा होता है।

थैलोफाइटा के 10 संघ (Phyla):

समूह

संघ का नाम

सामान्य उदाहरण

शैवाल (Algae)

सायनोफाइटा (Cyanophyta)

नीले-हरे शैवाल (नास्टॉक)

क्लोरोफाइटा (Chlorophyta)

हरे शैवाल (वॉलवॉक्स)

फीयोफाइटा (Phaeophyta)

भूरे शैवाल (फ्यूकस)

रोडोफाइटा (Rhodophyta)

लाल शैवाल (पॉलीसाइफोनियम)

कवक (Fungi)

शाइजोमाइकोफाइटा (Schizomycophyta)

जीवाणु (Bacteria)

यूमाइकोफाइटा (Eumycophyta)

सत्य


2. उपजगत: एम्ब्रयोफाइटा (Sub-kingdom: Embryophyta)

​इस समुदाय में थैलोफाइटा की तुलना में अधिक विकसित पौधे रखे गए हैं जिनमें भ्रूण का विकास होता है।

प्रमुख लक्षण:

  • ​युग्मनज से बहुकोशिकीय भ्रूण बनता है।
  • ​लैंगिक अंग बहुकोशिकीय होते हैं और बन्ध्य (Sterile) कोशिकाओं के आवरण से ढके रहते हैं।
  • ​इनमें पीढ़ी एकांतरण (Alternation of Generations) स्पष्ट रूप से पाया जाता है।

​एम्ब्रयोफाइटा को दो प्रमुख संघों में बाँटा गया है:

संघ 11: ब्रायोफाइटा (Bryophyta)

​ये स्वपोषी पौधे होते हैं जो नम और छायादार स्थानों पर उगते हैं। इन्हें पादप जगत का 'उभयचर' भी कहा जाता है।

  • लक्षण: इनमें संवहन ऊतक (Xylem/Phloem) नहीं होते। जड़ों के स्थान पर राइजोइड्स (Rhizoids) पाए जाते हैं।
  • प्रमुख वर्ग: हिपेटिसी, एन्थोसिरॉटी और मसाई।

संघ 12: ट्रैकियोफाइटा (Trachaeophyta)

​यह संघ संवहन ऊतकों (Vascular Tissues) की उपस्थिति के आधार पर पहचाना जाता है।

  • लक्षण: इनमें जाइलम और फ्लोएम स्पष्ट होते हैं। शरीर जड़, तना और पत्तियों में विभाजित रहता है।
  • उपसंघ (Sub-phyla):
    1. साइलॉप्सिडा (Psilopsida): आदिम संवहन पौधे।
    2. लाइकॉप्सिडा (Lycopsida): क्लब मॉस।
    3. स्फैनॉप्सिडा (Sphenopsida): हॉर्सटेल।
    4. टेरॉप्सिडा (Pteropsida): इसमें फ़र्न, जिम्नोस्पर्म और एन्जिओस्पर्मी (आवृतबीजी) शामिल हैं।

निष्कर्ष

​ओसवाल्ड टिप्पो का वर्गीकरण पादप जगत की जटिलता और उनके क्रमिक विकास (Evolution) को समझने का सबसे प्रामाणिक तरीका है। थैलोफाइटा जैसे सरल संरचना वाले पौधों से लेकर ट्रैकियोफाइटा जैसे विशालकाय आवृतबीजी पौधों तक का यह सफर वनस्पति विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वर्गीकरण न केवल शैक्षणिक दृष्टि से बल्कि कृषि अनुसंधान में भी बुनियादी आधार प्रदान करता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

1. ओसवाल्ड टिप्पो के वर्गीकरण का मुख्य आधार क्या है?

ओसवाल्ड टिप्पो ने भ्रूण की उपस्थिति और संवहन ऊतकों (Xylem/Phloem) के विकास को वर्गीकरण का मुख्य आधार बनाया है।

2. थैलोफाइटा और एम्ब्रयोफाइटा में मुख्य अंतर क्या है?

थैलोफाइटा में भ्रूण का निर्माण नहीं होता और शरीर सूकाय (Thallus) जैसा होता है, जबकि एम्ब्रयोफाइटा में भ्रूण बनता है और पौधे अधिक विकसित होते हैं।

3. ट्रैकियोफाइटा संघ की क्या विशेषता है?

ट्रैकियोफाइटा संघ के पौधों में संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, जो जल और भोजन के परिवहन में मदद करते हैं।

4. राइजोइड्स (Rhizoids) किन पौधों में पाए जाते हैं?

राइजोइड्स मुख्य रूप से ब्रायोफाइटा संघ के पौधों में पाए जाते हैं, जो जड़ों की तरह कार्य करते हैं और पौधे को सतह से चिपकाए रखते हैं।

5. जिम्नोस्पर्म और एन्जिओस्पर्मी किस उपसंघ के अंतर्गत आते हैं?

ओसवाल्ड टिप्पो के वर्गीकरण के अनुसार, ये दोनों समूह 'टेरॉप्सिडा' (Pteropsida) उपसंघ के अंतर्गत आते हैं।


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