फार्म या प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध क्या है अर्थ, परिभाषा एवं इसके उद्देश्य व कार्य-क्षेत्र लिखिए

एक प्रक्षेत्र‌ (फार्म) के सफलतापूर्वक प्रबन्ध करने की कला जिसे लाभदायकता के द्वारा नापा जा सकता है, प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) कहते है ।

प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) वह विज्ञान है जिसमें प्रक्षेत्र (फार्म) उद्यमों के संगठन तथा प्रबन्ध का अध्ययन निरन्तर अधिकतम लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है ।


प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध क्या है? | farm management in hindi


कृषि व्यवसाय का प्रबन्ध एक ऐसा विज्ञान है जिसके द्वारा इस क्षेत्र में धनोपार्जन के लिए कृषि क्रियाओं का संगठन सुचारू रूप से किया जाता है । कृषि की सफलता भूमि, श्रम, पूँजी के सफल एवं वैज्ञानिक प्रबन्ध पर निर्भर करती है ।

अतः प्रक्षेत्र प्रबन्ध की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए जी० डब्लू० फार्टर (G. W. Forster) ने उचित ही लिखा है -

"प्रक्षेत्र प्रबन्ध एक प्रक्षेत्र पर भूमि, श्रम, पूँजी के संगठन तथा अधिकतम लाभ के लिए तकनीकी ज्ञान एवं कुशलता का प्रयोग है ।"


प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध का क्या अर्थ है? | meaning of farm management in hindi


प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध का शाब्दिक अर्थ उसके प्रबन्ध करने की कला से है ।

प्रक्षेत्र प्रबन्ध किसी व्यक्तिगत फार्म उद्योग के चुनाव, संगठन और संचालन में ठोस सिद्धान्तों के प्रयोग की एक विधि है, जिससे यथासम्भव अधिकतम लाभ प्राप्त हो सके ।

संगठन और संचालन में उद्योग तथा वैज्ञानिक सिद्धान्तों के प्रयोग करने की प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) एक कला है ।


प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध की परिभाषा लिखिए? | defination of farm management in hindi


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के अन्तर्गत फार्मों का संगठन, संचालन, क्रय - विक्रय तथा पूँजी - नियोजन आता है और इन चारों का उपयुक्त अध्ययन प्रक्षेत्र प्रबन्ध की एक सामग्री है ।

प्रक्षेत्र प्रबन्ध की परिभाषा- “कृषि अर्थशास्त्र की एक शाखा है, जो कि कृषक की धन कमाने तथा व्यय करने की प्रवृत्तियों का भूमि की उर्वरता को बनाये रखते हुये, निरन्तर अधिकतम लाभ के उद्देश्य से व्यक्तिगत फार्म इकाई के संगठन तथा संचालन के साथ - साथ विपणन के कुछ अथवा सभी कार्यों का अध्ययन करती है, उसे प्रक्षेत्र प्रबन्ध (farm management in hindi) कहते है ।"


प्रक्षेत्र प्रबन्ध किसे कहते है? | farm management in hindi


प्रक्षेत्र प्रबन्ध कृषि अर्थशास्त्र की एक शाखा है जो कि एक फार्म के संगठन एवं संचालन में विभिन्न प्रकार के निर्णय लेने में मदद करता है, जिससे अधिकतम लाभ प्राप्त करके प्रक्षेत्र (farm in hindi) परिवार का आर्थिक कल्याण हो सके ।

प्रक्षेत्र प्रबन्ध किसे कहते है - "कार्यकुशलता तथा निरंतर लाभ के दृष्टिकोण से प्रक्षेत्र‌ के संगठन एवं संचालन के विज्ञान को प्रक्षेत्र‌ (फार्म) प्रबन्ध कहते है ।"

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प्रक्षेत्र प्रबन्ध  के अन्तर्गत किसका अध्ययन किया जाता है?


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के अन्तर्गत निम्नलिखित दो बातों का अध्ययन किया जाता है -

  • प्रक्षेत्र संगठन ( Farm organization )
  • प्रक्षेत्र संचालन या प्रबन्ध ( Farm operation or management )

यद्यपि प्रक्षेत्र संगठन एवं प्रक्षेत्र प्रबन्ध दोनों ही प्रक्षेत्र प्रबन्ध के अन्तर्गत आते हैं, परन्तु ये दोनों एक - दूसरे से भिन्न हैं ।

प्रक्षेत्र संगठन का अर्थ फार्म सम्बन्धी सामान्य उत्पादन की योजना बनाने से है । प्रक्षेत्र (farm in hindi) संचालन या प्रबन्ध इस तैयार की गई योजना को कार्य रूप में बदलकर उद्योग सम्बन्धी उन वस्तुओं के समायोजन के लिये आता है जो अधिकतम आर्थिक लाभ की प्राप्ति के लिये आवश्यक है । एक संगठनकर्ता का कर्त्तव्य है कि वह उत्पादन के साधनों का चुनाव करके उन्हें आपस में मिलाने की उत्तम विधि को ज्ञात करे । उनके लिये यह भी आवश्यक है कि वह विभिन्न उद्यमों का चुनाव करे कि उन्हें कृषि कार्यक्रम के अन्तर्गत किस प्रकार सर्वोत्तम ढंग से मिलाया जा सकता है ।

उत्पत्ति के साधनों का संयोग यदि आदर्श है तो उत्पादन अच्छा होगा तथा प्रति हैक्टेयर लाभ भी अधिकतम होगा, क्योंकि ऐसे संयोग से उत्पादन - व्यय न्यूनतम हो जाताहै, विपरीत स्थिति में लाभ प्राप्त नहीं हो सकेगा बल्कि हानि होगी ।


उत्पत्ति के चार प्रमुख कारक निम्न प्रकार से हैं -

  • भूमि ( Land )
  • श्रम ( Labour )
  • पूँजी ( Capital )
  • प्रबन्ध ( Management )

भारत में भूमि तथा पूँजी कारक सीमित है । यहाँ पर उत्पादन को बढ़ाने के लिये इन सभी कारकों के आदर्श संयोगों हेतु कृषकों द्वारा उत्तम प्रबन्ध - विधियों का बड़े पैमाने पर अपनाना अति आवश्यक है ।

उपरोक्त पहले तीनों कारकों के विभिन्न संयोगों का चुनाव अन्तिम कारक प्रबन्ध द्वारा ही किया जाता है । प्रक्षेत्र का प्रबन्ध फार्म मेनेजर (प्रक्षेत्र प्रबन्धक) के द्वारा किया जाता है, जिसकी योग्यता मनुष्य के अन्तर होती है । भारतीय कृषक एक श्रमिक व प्रबन्धक दोनों ही है ।


एक कृषक में प्रवन्ध क्षमता का उदय एवं विकास निम्न प्रकार होता है -

  • विचारों का उत्पन्न होना
  • उनका विश्लेषण करना
  • विश्लेषण के आधार पर निर्णय लेना
  • निर्णयों को लागू करना आदि ।

इस प्रकार से हम देखते हैं कि प्रक्षेत्र प्रबन्ध (farm management in hindi) निर्णय लेने वाला विज्ञान है । ऐसे निर्णय कि किस प्रकार से अन्य कारकों - भूमि, अम व पूँजी को संगठित किया जाये कि फार्म से अधिकाधिक शुद्ध लाभ प्राप्त हो ।


इस कार्य के लिये निम्न प्रकार के निर्णय प्रमुख है -

फार्म की स्थिति का विश्लेषण करके इस प्रकार के निर्णय लिये जायें कि फार्म पर कौन - कौन सी तथा किस - किस प्रजाति की फसलें उगाई जायें, कब कोई जायें, प्रत्येक फसल कितने - कितने क्षेत्र पर उगाई जायें, उनमें कौन - कौन सा, कितना - कितना खाद कब - कब व किस प्रकार डाला जाये, सिंचाई कितनी और कब की जाए, किस - किस नस्ल व जाति के पशु रखे जायें तथा वे कितनी संख्या में रखे जायें, प्रति हैक्टेयर व प्रति अणु पशु कितना धन कहाँ से तथा किस प्रकार प्राप्त किया जाये, फसल - उत्पादन व पशुपालन की कौन सी सर्वोत्तम विधि अपनाई जाये, श्रम, यन्त्र व मशीन आदि की व्यवस्था, क्रय - विक्रय कब, कैसे तथा कहाँ हो कि लाभदायक रहे तथा फार्म सम्बन्धी आय - व्यय का लेखा - जोखा किस प्रकार से रखा जाये कि कृषक को लाभ - हानि का पता चल सके और प्रक्षेत्र (farm in hindi) की कार्य क्षमता में वृद्धि हो सके आदि ।

अन्त में यह हिसाब लगाया जाता है कि फार्म व्यवसाय पर एक रुपया व्यय करने से कितनी आय प्राप्त हुई है, जैसे

₹ (आय)/₹ (व्यय) = ₹ 1•25 प्राप्त हुये ।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि एक सफल कृषक के लिए आवश्यक है कि उसमें एक कुशल प्रबन्धक के सभी गुण विद्यमान होने चाहिये ।


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के उद्देश्य लिखिए? | objectives of Farm Management in hindi


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के मुख्य उद्देश्य निम्नवत् हैं -

  • अधिकतम लाभ प्राप्ति  - सम्पूर्ण फार्म व्यवसाय को अधिकतम आय प्राप्त करना प्रक्षेत्र प्रबन्ध का प्रमुख उद्देश्य है अर्थात् दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि प्रक्षेत्र प्रबन्ध के अध्ययन का उद्देश्य कृषकों को यह बताना है कि - ( i ) किस प्रकार अधिक पैदावार लें?( ii ) अपनी उपज से कैसे अधिक मूल्य प्राप्त करें?( iii ) सम्पूर्ण प्रक्षेत्र व्यवसाय से कुल लाभ को बढ़ाने के लिये प्रति हेक्टेयर लागत को किस प्रकार कम करें ।
  • प्रक्षेत्र परिवार का सामाजिक कारण कृषक परिवारों की आर्थिक दशा सुदृढ़ करके उनके जीवन स्तर को ऊँचा उठाना ।
  • उपलब्ध साधनों को ध्यान में रखकर विभिन्न उद्यमों के सापेक्षिक लाभ एवं हानि के आधार पर उपयुक्त उद्यमों का चयन करना एवं समन्वय स्थापित करना ।
  • प्रक्षेत्र पर अपनाये जा रहे उद्यमों का अलग - अलग उत्पादान - उत्पत्ति सम्बन्ध ज्ञात करना जिससे अलाभकारी उद्यमों को बन्द किया जा सके ।
  • उपलब्ध साधनों का उपयुक्त प्रयोग करना तथा कमियों की जानकारी करना जिससे उन्हें दूर किया जा सके ।
  • उपलब्ध साधनों के उपयुक्त संयोगों को ज्ञात करना जो अधिकतम लाभ दे सके ।
  • उत्पादन लागत एवं प्राप्तियों की गणना करना तथा लागत - लाभ अनुपात ज्ञात करना ।
  • प्रक्षेत्र के श्रमिकों की कार्यक्षमता एवं कार्य कुशलता बढ़ाने के उपाय ज्ञात करना ।
  • प्रक्षेत्र लाभ एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने की विभिन्न विधियाँ ज्ञात करना ।
  • प्रक्षेत्र पर नवीन तकनीकी एवं वैज्ञानिक परिवर्तन अपनाने से प्रक्षेत्र - व्यवसाय पर पड़ने वाले प्रभावों को ज्ञात करना ।


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प्रक्षेत्र प्रबन्ध के कार्यों की विवेचना कीजिए? | functions of farm management in hindi

प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) का सम्बन्ध प्रक्षेत्र के विभिन्न उद्यमों के संगठन एवं संचालन से होता है, जिसके अन्तर्गत एक प्रक्षेत्र प्रबन्धक को निम्नांकित कार्य करने पड़ते हैं ।


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है -

  • प्रक्षेत्र पर कृषि के साथ - साथ और अन्य कौन - कौन से उद्यम उपयुक्त रहेंगे उनका चुनाव करना ।
  • विभिन्न उद्यमों से सम्बन्धित क्रियाओं को करने की आधुनिकतम विधियाँ ढूँढ़ना ।
  • उत्पत्ति के विभिन्न साधनों एवं कृषि क्रियाओं में आपसी सामंजस्य स्थापित करना तथा आवश्यकतानुसार पूर्व निर्धारित कार्यों में परिवर्तन करना ।
  • प्रक्षेत्र पर उपलब्ध साधनों का नियन्त्रण एवं निर्देशन करना ।
  • प्रक्षेत्र पर विभिन्न कार्यों के अनुसार श्रमिकों का चुनाव, नियुक्ति एवं कार्य योजना तैयार करना ।
  • प्रक्षेत्र पर आय - व्यय का ब्योरा एवं प्रलेखों का रख - रखाव करना ।
  • प्रक्षेत्र पर उपादानों का क्रय तथा उत्पादन का विक्रय सही ढंग से करना ।


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के विषय-सामग्री के बारे में लिखिए? | subject -matter of farm management in hindi

इस प्रकार से प्रक्षेत्र प्रबन्ध की विषय - सामग्री भी प्रक्षेत्र प्रबन्ध के कार्य क्षेत्र (scope) के अन्तर्गत ही जाती है ।


प्रक्षेत्र प्रबन्ध का कार्य क्षेत्र -

  • फार्म का चुनाव ( Selection of Farm )
  • प्रक्षेत्र संसाधनों का मूल्यांकन ( Appraisal of Farm Resources )
  • कृषि का उद्योग के रूप में चुनाव ( Selection of Agriculture as a business )
  • कृषि की प्रकार का चुनाव ( Selection of type of farming )
  • फार्म - पूँजी निर्धारण एवं कृषि - वित्त व्यवस्था ( Determination of Farm Capital and Provision of Agricultural Finance )
  • कृषि - व्यवसाय का प्रबन्ध ( Management of Agri - Business )
  • आवश्यक प्रक्षेत्र उपकरणों की समुचित व्यवस्था ( Proper arrangement of essential Farm Equipments )
  • प्रति हैक्टर फसल या प्रति पशु के लिये विभिन्न उत्पादन - साधनों का प्रयोग किस मात्रा में किया जाए और कितनी पैदावार करने का लक्ष्य रखा जाए?
  • पैदावार के एक निर्धारित स्तर को प्राप्त करने के लिये उत्पादन - साधनों के किस सम्मिश्रण का प्रयोग किया जाए?
  • प्रक्षेत्र श्रम प्रवन्ध ( Management of Farm Labour )
  • फार्म की आय - व्यय सम्बन्धी गणना ( Keeping Farm Accounts )
  • कृषि विपणन ( Agricultural Marketing ) |


प्रक्षेत्र प्रबन्ध की अवधारणा लिखिए? | concept of farm management in hindi


आज बड़े - बड़े फार्मों की तरह छोटे - छोटे फार्मों पर भी कृषक कृषि की आधुनिक प्रोद्योगिकी तथा अधिक उपज वाली किस्मों के बीज, सिंचाई की उन्नत विधियाँ, रासायनिक उर्वरकों, पादप सुरक्षा साधनों और उन्नत कृषि यन्त्रों आदि को अपनाकर लाभ उठा रहे हैं । प्रमुख फसलों की उपज प्रति हेक्टेयर बढ़ जाने से अब उपज का एक बड़ा भाग कृषक बाजार में बेचते हैं ।

इस प्रकार प्राप्त आय से वे अपनी आवश्यकता की उन वस्तुओं को बाजार से खरीदते हैं जिनका उत्पादन वे अपने फार्मों पर नहीं करते । इस प्रकार अब छोटे - छोटे किसान भी कृषि मूल्यों के उतार - चढ़ाव से उसी प्रकार प्रभावित होते हैं, जिस प्रकार बड़े - बड़े किसान । इसके अतिरिक्त, सरकार द्वारा चलाये गये विभिन्न प्रकार के कृषि विकास कार्यक्रमों जैसे चकबन्दी, सिंचाई सुविधायें, संस्थागत स्रोतों से कृषि वित्त - सुविधायें, समुचित विपणन एवं भंडारण सुविधायें और उचित कृषि - मूल्य नीति आदि के फलस्वरूप कृषि व्यवसाय (agri business in hindi) की लाभदायकत्ता पहले की अपेक्षा कहीं अधिक बढ़ गई है ।

इस प्रकार तकनीकी, आर्थिक व सामाजिक परिवर्तनों के फलस्वरूप आज भारतीय कृषि में नियोजन व प्रबन्ध (planning and management) की नई सम्भावनायें और नई दिशायें उभर रही हैं । इनके प्रति प्रत्येक स्तर पर कृषक को जागरूक होने की आवश्यकता है । इसी आवश्यकता के कारण वर्तमान कृषि जगत में प्रक्षेत्र प्रबन्ध का महत्व बढ़ता जा रहा है । इन सब सम्भावनाओं से समुचित लाभ उठाने के लिये अब कृषक को भी नियोजन एवं प्रबन्ध के उन्हीं सिद्धान्तों और पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता है जिन्हें सफल व्यवसायी अपनाते हैं । अपने साधनों - जैसे भूमि , श्रम, पूँजी व प्रबन्ध से अधिकतम सम्भव लाभ प्राप्त करने के लिये अब कृषक को फसलों तथा पशु - धन के उत्तम संयोगों के चयन में अत्यन्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है ।

प्रक्षेत्र - सम्बन्धी विभिन्न निर्णयों (farm decisions) का सीधा प्रभाव फार्म की लाभदायकता पर पड़ता है । जो कृषक बदलती हुई दशाओं के अनुसार अपने फार्म व्यवसाय में आवश्यक परिवर्तन नहीं करते हैं या नहीं कर सकते हैं, उनके लिये कृषि एक घाटे का व्यवसाय सिद्ध होगा और वे कृषि - उत्पादन व आय बढ़ाने की दौड़ में पीछे रह जायेंगे ।

अत: उपरोक्त सब कारणों से वर्तमान परिस्थितियों में प्रक्षेत्र प्रबन्ध का महत्व विशेष रूप से बढ़ता ही जा रहा है ।


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प्रक्षेत्र प्रबन्ध की प्रकृति अथवा स्वभाव लिखिए? | nature of farm management in hindi


प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) की विभिन्न विद्वानों के द्वारा दी गई परिभाषाओं के अध्ययन के आधार पर यह पूर्णतः स्पष्ट है कि प्रक्षेत्र प्रबन्ध कला (art), विज्ञान (science) तथा व्यवसाय (business) है । कला शब्द का अर्थ भौतिक दृष्टियों से ही नहीं वरन् मानसिक दृष्टिकोण से भी दक्षता (skill) से है । कार्यों के करने की चतुराई तथा निपुणता को कला कहते हैं । कृषि के विभिन्न कार्यों को करने में चतुराई तथा निपुणता की आवश्यकता है । कुछ कृषक कुछ कार्यों को अन्य कृषकों की अपेक्षा शीघ्र, अधिक मात्रा में, आसानी से तथा निपुणतापूर्वक करने में समर्थ होते हैं । वे अधिक कुशल समझे जाते हैं । अत: प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) की एक कला है ।

किसी वस्तु के क्रमबद्ध अध्ययन को ही विज्ञान कहते हैं । ज्ञान का वह अंग क्रमबद्ध अध्ययन व अनुसन्धान द्वारा ही प्राप्त होता है । एक सामान्य नियम के सिद्धान्त को सिद्ध करने के लिये सत्यता के आँकड़ों का अध्ययन व विश्लेषण करके समस्या की खोज और उसका समाधान ढूँढ़ा जाता है । इस प्रकार प्रक्षेत्र प्रबन्ध एक विज्ञान है, साथ ही इसे एक विशिष्ट व्यावहारिक विज्ञान के रूप में अपनाया जाता है, क्योंकि यह विज्ञान व्यावहारिकता (practicability) के साथ - साथ लाभदायकता (profitability) बनाये रखने में सहायक होता है ।

व्यवसाय (business) वह साहस है जो लाभ प्राप्ति के लिये प्रारम्भ किया जाता है । प्रक्षेत्र प्रबन्धक का मुख्य उद्देश्य प्रति हैक्टेयर अधिकतम लाभ प्राप्त करना होता है इसलिए कृषक/प्रबन्धक कृषि फार्म का विधिपूर्वक संचालन करता है, तथा वह कृषि उद्योग में अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिये फार्म के संगठन और प्रबन्ध में उद्योग के सभी सिद्धान्तों का व्यवहारिक प्रयोग करता है ।

अत: प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध (farm management in hindi) एक व्यवसाय भी है जिसमें प्रत्येक प्रक्षेत्र के लिए अलग परिस्थितियों एवं उपलब्ध साधनों के अनुसार योजना बनानी पड़ती है तथा कृषि विधियों एवं उद्यमों का चुनाव एवं संयोजन करना पड़ता है ।


प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध का कार्य क्षेत्र लिखिए? | scope of farm management in hindi


सामान्यत : प्रक्षेत्र प्रबन्ध के कार्य क्षेत्र (scope of farm management in hindi) के विभिन्न दृष्टिकोणों में से सर्वप्रथम प्रक्षेत्र प्रबन्ध व्यष्टि अर्थशास्त्र के क्षेत्र के अन्तर्गत आता है । इसका कार्य व्यक्तिगत फार्म इकाई स्तर पर साधनों को लगाना है ।

यह कृषि के समस्त पहलुओं से सम्बन्धित है जिनका कि फार्म की आर्थिक कार्यक्षमता से सम्बन्ध है अर्थात् यह उन सभी पहलुओं का अध्ययन करता है जैसे कि कौन - कौन से उद्यम रक्खे, किस प्रकार की फसलें उगाई जायें, प्रयोग किये जाने वाले उर्वरक की मात्रा, प्रयोग में लाये जाने वाले यन्त्रों के प्रकार आदि सभी प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध के अध्ययन का विषय है ।

कृषि विज्ञान के क्षेत्रों में प्रक्षेत्र प्रबन्ध ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जिसका सम्बन्ध लाभ उपार्जन से है । कृषि विज्ञान के अधिकांश क्षेत्रों में उत्पादन सम्बन्धी अनेक तथ्यों का पता लगाया जाता है, जैसे अमुक किस्म का बीज बोने से या अमुक मात्रा में अमुक उर्वरक डालने से कितना उत्पादन होगा, अमुक नस्ल की गाय के अमुक प्रकार तथा मात्रा का रातब खिलाने से दूध उत्पादन में कितनी वृद्धि होगी आदि । एक सफल कृषि व्यवसाय के लिये ये तथ्य बहुत महत्वपूर्ण है । वस्तुत: इन विषयों की जानकारी न होने से प्रक्षेत्र प्रबन्ध का कार्य बहुत सीमित हो जाता है ।

प्रक्षेत्र - प्रबन्ध के अध्ययन क्षेत्र में ऐसे कारकों का भी समावेश होता है जिन पर व्यक्तिगत रूप से कृषक का कोई नियन्त्रण नहीं होता जैसे - भूमि सुधार व जोत सम्बन्धी कानून ऋण प्रणाली, विपणन प्रणाली, यातायात, भण्डारण, सिंचाई व जल निकास सुविधायें आदि, परन्तु ये फार्म आय को प्रभावित करते हैं ।


प्रक्षेत्र प्रबन्ध के क्षेत्र (scope of farm management in hindi) के अन्तर्गत अनुसन्धान, शिक्षण एवं प्रसार आते हैं । अनुसन्धान द्वारा कृषक के फार्म पर आर्थिक समस्या सम्बन्धी आँकड़े इकट्ठे किये जाते हैं । फार्म के अकुशलतापूर्ण कार्यों के कारण जानने के लिये इन आँकड़ों का विश्लेषण भी किया जाता है । अन्त में कृषक की इन समस्याओं के निदान के उपाय निकाले जाते अध्ययन के आधार पर निकाले गये परिणामों को कृषकों तक पहुँचाया जाता है । कृषकों को व्यक्तिगत रूप से इन परिणामों को अपनाने के सम्बन्ध में शिक्षित किया जाता है । शिक्षा के अभाव के कारण बहुत से कृषक इन परिणामों का अनुसरण करने में असमर्थ रह जाते हैं ।

अतः प्रक्षेत्र प्रबन्ध (farm management in hindi) की इन नई खोजों की उपयोगिता एवं प्रभावोत्पादकता दिखलाने के लिये प्रदर्शन आयोजित किये जाते हैं । यह कार्य प्रसार का है । अनुभव बतलाता है कि कृषकों की प्रबन्ध सामर्थ्य को प्रसार कार्यक्रमों द्वारा काफी विकसित किया जा सकता है ।

इस प्रकार से प्रक्षेत्र - स्तर पर अनुसन्धान, शिक्षण तथा प्रसार एक साथ साधनों के उपयोग में अपेक्षित परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होते हैं ।


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प्रक्षेत्र - प्रबन्ध एवं कृषि अर्थशास्त्र में सम्बन्ध लिखिए?

कृषि उत्पादन अर्थशास्त्र कृषि अर्थशास्त्र की शाखा है, जबकि प्रक्षेत्र‌ प्रबन्ध, कृषि उत्पादन अर्थशास्त्र की एक शाखा है ।


कृषि अर्थशास्त्र ( Agricultural Economics In Hindi ) -

“कृषि अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो कृषक की अनन्त समस्याओं का दुर्लभ साधनों के द्वारा समाधान करने के लिये पारस्परिक सम्बन्ध की विवेचना करता है जिससे अधिक से अधिक लाभ व सन्तुष्टि प्राप्त की जा सके ।"


प्रक्षेत्र प्रबन्ध ( Farm Management In Hindi ) -

“प्रक्षेत्र प्रबन्ध कृषि अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो किसान की धन कमाने तथा खर्च करने की क्रियाओं से सम्बन्धित है । इसके अन्तर्गत व्यक्तिगत प्रक्षेत्र इकाई का संगठन, प्रबन्ध तथा भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाये रखते हुये अधिकतम लाभ प्राप्त करने हेतु कुछ या सभी क्रय - विक्रय कार्य सम्मिलित हैं ।"

उपरोक्त दोनों परिभाषाओं के आधार पर यह स्पष्ट है कि प्रक्षेत्र प्रबन्ध कृषि अर्थशास्त्र की एक शाखा है । प्रक्षेत्र प्रबन्ध व्यक्तिगत प्रक्षेत्र इकाई के प्रबन्ध एवं कार्यशीलता से सम्बन्धित है, जबकि कृषि अर्थशास्त्र कृषि से सम्बन्धित पूर्ण अर्थशास्त्र (total economy related to agriculture) का अध्ययन करता है । 


कृषि अर्थशास्त्र एवं प्रक्षेत्र प्रबन्ध में क्या अंतर है? | difference between agriculture economics and farm management in hindi


1. कृषि अर्थशास्त्र ( Agricultural economics in hindi )

  • कृषि अर्थशास्त्र, अर्थशास्त्र की विशिष्ट शाखा है ।
  • कृषि अर्थशास्त्र में पूर्ण कृषि उद्योग की समस्याओं का अध्ययन किया जाता है ।
  • कृषि अर्थशास्त्र में आर्थिक नियमों का प्रतिपादन किया जाता है ।
  • कृषि अर्थशास्त्र एक सार्वजनिक अर्थव्यवस्था है ।
  • कृषि अर्थशास्त्र एक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में कार्य करता है ।
  • कृषि अर्थशास्त्र में कृषकों की आय के विभिन्न स्रोतों का अध्ययन किया जाता है ।


2. प्रक्षेत्र प्रबन्ध ( Farm management in hindi )

  • प्रक्षेत्र प्रबन्ध, कृषि अर्थशास्त्र की एक शाखा है ।
  • प्रक्षेत्र प्रबन्ध में व्यक्तिगत प्रक्षेत्र इकाई की समस्याओं का अध्ययन किया जाता है ।
  • यहा इन्हीं आर्थिक नियमों को व्यवहारिक रूप से प्रयोग किया जाता है ।
  • यह एक व्यक्तिगत अर्थव्यवस्था है ।
  • यह एक डाक्टर की तरह कार्य करता है ।
  • प्रक्षेत्र प्रबन्ध में केवल प्रक्षेत्र से सम्बन्धित साधनों का अध्ययन करते हैं ।


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