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| Drainage in Hindi - Agriculture Studyy |
जल निकास की परिभाषा (Definition of Drainage in Hindi)
खेत की ऊपरी सतह या पौधों के जड़ क्षेत्र (Root Zone) में एकत्रित अतिरिक्त और हानिकारक पानी को कृत्रिम तरीके से बाहर निकालने की क्रिया को जल निकास (Drainage) कहते हैं।
Expert Definition: "पौधों के विकास के लिए भूमि में उचित वायु संचार और अनुकूल वातावरण बनाए रखने हेतु कृत्रिम रूप से गुरुत्वीय जल (Gravitational Water) को बाहर निकालना ही जल निकास है।"
जल निकास की प्रमुख विधियाँ (Methods of Drainage)
खेत की स्थिति और मिट्टी के प्रकार के आधार पर जल निकास को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:
1. सतही या पृष्ठीय जल निकास (Surface Drainage)
जब भूमि की सतह पर जमा अतिरिक्त वर्षा या सिंचाई के पानी को नालियों द्वारा बाहर निकाला जाता है, तो इसे सतही जल निकास कहते हैं। इसकी प्रमुख तकनीकें हैं:
- समतलीकरण (Levelling): ऊँची-नीची भूमि को बराबर करना ताकि पानी एक जगह जमा न हो।
- क्यारियाँ बनाना (Bedding): भारी मिट्टी वाले क्षेत्रों में छोटी क्यारियाँ बनाकर पानी बाहर निकाला जाता है।
- खुली नालियाँ (Open Drains): खेत के किनारों पर ढाल के अनुसार नालियाँ बनाना।
2. भूमिगत जल निकास (Underground Drainage)
मिट्टी के भीतर (Root zone) जमा पानी को निकालने के लिए यह विधि अपनाई जाती है। इसमें सतह के नीचे काम किया जाता है:
- पाइपों द्वारा निकास: प्लास्टिक या सीमेंट के पाइपों को निश्चित गहराई पर दबाया जाता है।
- मोल निकास (Mole Drainage): बिना किसी पाइप के मिट्टी के भीतर बेलनाकार नालियाँ बनाना।
[Image showing cross-section of surface vs underground drainage methods]
जल निकास के मुख्य उद्देश्य और लाभ
खेत में जल निकास प्रबंधन करने से निम्नलिखित फायदे होते हैं:
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उद्देश्य/लाभ |
मुख्य प्रभाव |
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वायु संचार (Aeration) |
मिट्टी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और हानिकारक गैसें बाहर निकलती हैं। |
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जड़ों का विकास |
जड़ें गहराई तक जाती हैं, जिससे पौधों को अधिक पोषक तत्व मिलते हैं। |
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लवण नियंत्रण |
हानिकारक लवण पानी के साथ बह जाते हैं, जिससे भूमि ऊसर (Saline) नहीं होती। |
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जीवाणु सक्रियता |
लाभदायक सूक्ष्म जीवाणुओं की क्रियाशीलता बढ़ती है। |
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समय पर कृषि कार्य |
खेत जल्दी सूखता है, जिससे जुताई और बुवाई समय पर संभव हो पाती है। |
जल निकास की प्रमुख प्रणालियाँ (Drainage Systems)
नालियों के डिजाइन के आधार पर तीन प्रणालियाँ सबसे अधिक प्रचलित हैं:
- प्राकृतिक प्रणाली (Natural System): इसमें प्राकृतिक ढाल के अनुसार नालियाँ बनाई जाती हैं। यह सबसे सस्ती विधि है।
- हैरिंग बोन प्रणाली (Herring Bone System): इसमें एक मुख्य नाली बीच में होती है और सहायक नालियाँ दोनों ओर से मछली की हड्डियों की तरह आकर जुड़ती हैं।
- ग्रिडीरोन प्रणाली (Giridiron System): इसमें मुख्य नाली खेत के एक किनारे पर होती है और सहायक नालियाँ एक ही दिशा से आकर इसमें मिलती हैं।
अतिरिक्त जल का फसलों पर कुप्रभाव (Disadvantages of Poor Drainage)
यदि खेत से पानी नहीं निकाला गया, तो निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:
- जड़ों का सड़ना: ऑक्सीजन की कमी से जड़ें काली पड़कर सड़ने लगती हैं।
- बीमारियाँ: अधिक नमी के कारण गन्ने का लाल रोग और अन्य कवक (Fungus) जनित बीमारियाँ बढ़ती हैं।
- तापमान में गिरावट: मिट्टी का तापमान कम हो जाता है, जिससे बीजों का अंकुरण (Germination) ठीक से नहीं होता।
- पोषक तत्वों का निक्षालन (Leaching): जरूरी खाद-उर्वरक पानी के साथ घुलकर गहराई में चले जाते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
सफल खेती के लिए जल प्रबंधन का अर्थ केवल पानी देना नहीं, बल्कि फालतू पानी को बाहर निकालना भी है। वैज्ञानिक तरीके से किया गया जल निकास न केवल मिट्टी की संरचना सुधारता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर कृषि उत्पादन बढ़ाकर किसानों को संपन्न बनाता है। Agriculture Studyy आपको हमेशा नवीनतम कृषि तकनीकों से अपडेट रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: जल निकास और सिंचाई में क्या अंतर है?
उत्तर: सिंचाई का अर्थ है फसलों को कृत्रिम रूप से पानी देना, जबकि जल निकास का अर्थ है खेत में जमा अतिरिक्त और फालतू पानी को बाहर निकालना।
प्रश्न 2: मोल ड्रेनेज (Mole Drainage) क्या है?
उत्तर: यह भूमिगत जल निकास की वह विधि है जिसमें बिना पाइप डाले मिट्टी के भीतर बेलनाकार नालियाँ बनाई जाती हैं। यह चिकनी मिट्टी (Clay soil) के लिए उपयुक्त है।
प्रश्न 3: जल निकास से मृदा ताप पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: अतिरिक्त पानी मिट्टी को ठंडा रखता है। जल निकास करने से मिट्टी का तापमान उचित बना रहता है, जो पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 4: हैरिंग बोन और ग्रिडीरोन प्रणाली में क्या अंतर है?
उत्तर: हैरिंग बोन में मुख्य नाली बीच में होती है और सहायक नालियाँ दोनों तरफ से आती हैं, जबकि ग्रिडीरोन में मुख्य नाली किनारे पर होती है।
प्रश्न 5: क्या जल निकास से ऊसर भूमि को सुधारा जा सकता है?
उत्तर: हाँ, जल निकास द्वारा हानिकारक लवणों को पानी के साथ बहाकर बाहर निकाला जा सकता है, जिससे ऊसर भूमि की उर्वरता में सुधार होता है।

4 Comments
Nice
ReplyDeleteThank you.
DeleteAnd follow me
जल निकाल का परिभाषा
ReplyDeleteGood information bhai
ReplyDeleteजल निकास की प्रणालियां
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