दुग्ध दोहन (milking in hindi) - दुग्ध दोहन की प्रमुख विधियां एवं सिद्धांत लिखिए

गाय, भैंस, बकरी एवं इत्यादि किसी भी दुधारू पशुओं के थनों से दूध को बाहर निकालने की संपूर्ण प्रक्रिया दुग्ध दोहन (milking in hindi) कहलाती है ।

दूध निकालने की इस क्रिया को गो-दोहन के नाम से भी जाना जाता है ।

किसी भी दुधारू पशु के थनों से दूध को बाहर निकालने के लिए जो तरीके उपयोग में लाए जाते है, उन्हें दुग्ध दोहन की विधियां (methods of milking in hindi) कहा जाता है ।

दुग्ध‌ दोहन की प्रक्रिया दिन में दो बार सुबह-शाम एक निश्चित समय पर दोहराई जाती है और दुधारू पशुओं से दूध निकाला जाता है ।


दुग्ध दोहन या गो-दोहन की प्रविधि क्या है? what is milking in hindi


दूध दोहन भी एक कला हैं ।

एक कुशल दूध दोहने वाला (ग्वाला) गाय को कम से कम समय में बड़ी दक्षता, धीरता, सफाई एवं पूर्ण रूप से दोह लेता हैं ।

अत: दुग्ध‌ दोहन (milking in hindi) में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि दुग्ध‌ दोहन का कार्य जितना भी शीघ्र पूरा हो जाये, उतना ही अच्छा होता है ।

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दुग्ध दोहन की प्रमुख विधियां (methods of milking in hindi)

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पशु का पावसना या दूध उतारना किस प्रकार से होता है पूरी जानकारी?


गाय के स्तनों में दूध का उतारना तन्त्रिकीय एवं हामॉनिक क्रियाओं के संयुक्त प्रभाव से होता है । दूध दूहे जाने के पूर्व गाय को उद्दीपन (उत्तेजना) का कार्य करता है ।

तन्त्रिका प्रणाली पश्च पीयूष ग्रन्थि को सन्देश प्रसारित करती है, जिससे यह ग्रन्थि एक ऑक्सीटोसीन नामक हार्मोन पैदा करती है ।

नोट: दुधारू पशुओं में ऑक्सीटोसीन नामक हार्मोन ही दूध उतारने में उत्तरदायी होता है ।

यह हार्मोन रक्त में मिलकर अयन में पहुँचता है और दूध को उतरने में मदद करता है । यही गाय का पावसना (दूध उतारना) कहलाता है ।

हाथ से दूध दुहते समय थन-कुण्डिका का ऊपरी भाग तो मुट्ठी के दबाव में बन्द हो जाता है जिससे थन-कुण्डिका से पलट कर अयन की ग्रन्थि-कुण्डिका में नहीं जा पाता और दूध से भरे थन पर जब मुट्ठी का दबाव पड़ता है तो थन के अन्दर बढ़ा हुआ दबाव अवरोधिनी पेशी को चौड़ा कर देता है जिससे थन के रन्ध्र खुल जाते हैं, दूध तेजी से बाहर निकलता है ।


दुग्ध दोहन से पहले की तैयारी कैसी होनी चाहिए?  preparation for milking in hindi


दुग्ध दोहन की तैयारी - गाय एवं भैस के दुहने के पश्चात दुग्धशाला को खूब रगड़कर धोना चाहिये जिससे अगली बार दूध निकालने से पूर्व वह स्वच्छ तथा सूखी रहे ।

पशुओं को नियमित रूप से खुरेरा करना चाहिये । दूध दोहन (milking in hindi) से पूर्व पशु के पिछले धड़ एवं जांघों को अच्छी प्रकार साफ कर देना चाहिये तथा अयन को जीवाणुनाशक घोल में स्वच्छ कपड़ा भिगोकर पौंछ देना चाहिये ।


दुग्ध दोहन की तैयारी में ध्यान रखने योग्य बातें?


दूध निकालते समय कभी भी पशुओं को सूखे अथवा हरे चारे जिसमें धूल की सम्भावना होती है, नहीं खिलाने चाहिये ।

दुग्धशाला, पशु एवं उसके अयन की सफाई के साथ - साथ दूध दोहने वाला तथा दुहने की बाल्टियाँ भी स्वच्छ होनी चाहिये ।

दूधिया स्वच्छ कपड़े पहने होना चाहिये उसके नाखून कटे हों तथा सिर पर टोपी पहने होना चाहिये । दूधिया के हाथ साबुन अथवा किसी अपमार्जक (detergent) से धुले होने चाहिये ।

खुली बाल्टी के स्थान पर गुम्बदाकार (domed) बाल्टी प्रयोग करनी चाहिये दूध के बर्तनों को धोकर उल्टा करके रखना चाहिये ।

यह ध्यान रखना चाहिये कि पशु दोहन के लिये एक हत्था न होने पाये इसके लिये पशु को विभिन्न दिनों में विभिन्न व्यक्तियों द्वारा दुहना चाहिये ।

पशु के आहार में परिवर्तन धीरे - धीरे करना चाहिये । क्योंकि आहार में एक साथ परिवर्तन का दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है ।


दुग्धशाला में दुग्ध दोहन की तैयारी कैसी होनी चाहिए?


राजकीय डेयरी फार्मों पर तथा अन्य संगठित फार्मों पर पशुशाला के अतिरिक्त एक दुग्धशाला भी होती है ।

दुग्धशाला में पशु को केवल दूध निकालने के लिये ही लाया जाता है । यह स्वच्छ एवं साफ जगह होती है । पशुओं को छोटी - छोटी बाल्टियों में दूध निकालते समय दाना खिलाया जाता है ।

किसी भी परिस्थिति में पानी अथवा दूध से हाथ भिगोकर गीले हाथों से दूध नहीं निकालना चाहिये यह अत्यंत अस्वास्थ्यकर होता है ।


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दुग्ध दोहन एवं ‌गौ दोहन के सिद्धांतों का वर्णन कीजिये? principles of milking in hindi


डेरी पशुओं का दुग्ध दोहन (milking in hindi) एक कला है, जिसमें अनुभव की आवश्यकता होती है ।

दुग्ध दोहन की क्रिया शांतिपूर्वक (quitly), शालीनता पूर्वक (gently), शीघ्रतापूर्वक (quickly) एवं स्वच्छता पूर्वक (cleanly) सम्पन्न की जानी चाहिये, जिससे पशु को किसी प्रकार की असुविधा या कष्ट न होने पाये ।

दूध निकालने की कला में निपुण व्यक्ति पशु से अधिक दूध प्राप्त कर सकता है ।


दुधारू पशुओं के दुग्ध दोहन हेतु निम्नलिखित सिद्धांतों का पालन करना चाहिये -

  • पशु पूर्णतया स्वस्थ होना चाहिये उसे किसी भी प्रकार की कोई बीमारी नहीं होनी चाहिये ।
  • पशु को यथा सम्भव साफ कर लेना चाहिये ।
  • दूध निकालने वाले ग्वाले को साफ, स्वस्थ, एवं दूध निकालने में निपुण होना चाहिये ।
  • ग्वाले (milker) को दूध से फैलने वाली बीमारी नहीं होनी चाहिये ।
  • दूध निकालते समय ग्वाले के हाथ एवं वस्त्र साफ एवं स्वच्छ होने चाहिये ।
  • दूध निकालने का बर्तन अच्छी प्रकार निर्जीकृत होना चाहिये । यह बर्तन कम चौड़े मुंह वाला होना चाहिये ।
  • दूध निकालने का स्थान शांत वातावरण में होना चाहिये, वहाँ किसी भी प्रकार का शोर नहीं होना चाहिये तथा वह स्थान धूल आदि से सुरक्षित होना चाहिये ।
  • दूध निकालने के स्थान पर समुचित प्रकाश एवं वातायन की व्यवस्था होनी चाहिये । उस स्थान पर जल निकास की उत्तम व्यवस्था होनी चाहिये ।
  • गाय, भैंसो का स्थान सदैव स्वच्छ होना चाहिये । जाना चाहिये ।
  • पशुओं का चारा एवं बिछावन बिछाने का कार्य दूध निकालने के पश्चात् ही किया जाना चाहिए ।
  • दूध निकालते समय ग्वाले को पानी या दूध से अपने हाथ गीले नहीं करने चाहिये अर्थात् दूध सदैव सूखे हाथों से ही निकालना चाहिये ।
  • दूध निकालने की पूर्ण हस्त विधि (full hand method) सर्वोत्तम विधि है अतः इसी विधि द्वारा दूध निकालना चाहिये ।
  • पशुओं का दुग्ध दोहन सदैव शीघ्रता से, शांति से एवं पूर्णतया करना चाहिये ।
  • दुग्ध दोहन में नियमितता का पालन किया जाना चाहिये । प्राय: 5 बजे एवं सांय 5 बजे दो बार दुहने वाले पशुओं का दूध निकालना चाहिये । अधिक दूध देने वाले पशुओं का दूध दिन में तीन बार, प्रात: 4 बजे, दिन में 12 बजे रात्रि में 8 बजे निकालना चाहिये ।
  • पशुओं से सदैव स्नेहपूर्वक व्यवहार करना चाहिये ।
  • दुग्ध दोहन के पूर्ण अभिलेख रखे जाने चाहिये ।
  • दूध को पशुओं के रहने के स्थान पर अधिक समय तक नहीं रखना चाहिये ।
  • दुग्ध दोहन में सदैव पूर्ण स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिये ।
  • दूध निकालते समय प्रत्येक थन की पहली 2-3 धार अलग बर्तन में ले लेनी चाहिये, इससे थन नलिका (teat canal) में उपस्थित जीवाणुओं से छुटकारा मिल जाता है तथा थनैला (mastitis) की जाँच भी हो जाती है ।
  • गाय, भैंस के बच्चे द्वारा थन नहीं चुसाने चाहिये अर्थात् बच्चों को माँ से अलग रखकर पालना चाहिये ।

दुग्ध दोहन की प्रमुख विधियां कोन-कोन सी है? | methods of milking in hindi


दुधारू पशुओं में दुग्ध दोहन की प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं -

1. हाथ द्वारा दुग्ध दोहन ( Milking By Hand )

  • अंगूठा दबाकर दूध निकालना
  • चुटकी से दूध निकालना
  • पूर्ण हस्त विधि या थन को मुट्ठी के बीच दबाकर दूध निकालना
2. मशीनों द्वारा दुग्ध दोहन ( Milking By Machine )


दुग्ध दोहन की प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिये? methods of milking in hindi

विकसित पश्चिमी देशों में जहाँ प्रत्येक फार्म पर हजारों की संख्या में दूध देने वाले पशु होते हैं, दुग्ध दोहन का कार्य मशीनों द्वारा किया जाता हैं परन्तु भारत में अधिकांश पशुपालक एक या दो पशु रखकर उनका दूध बेचकर अपनी जीविका कमाते हैं जिससे दुग्ध दोहन की क्रिया (milking in hindi) मशीनों के स्थान पर हाथ से की जाती है । फिर भी कहीं - कहीं बड़े फार्मों पर भारत में भी मशीनों द्वारा दूध निकाला जाता है ।


1. हाथ द्वारा दुग्ध दोहन की विधियां | milking by hand in hindi

दुधारू पशुओं में हाथ से दुग्ध दोहन या निकालने की मुख्यत: तीन प्रमुख विधियां अपनाई जाती है ।


हाथ द्वारा दुग्ध दोहन की प्रमुख विधियां -

  • अंगूठा दबाकर दूध निकालना
  • चुटकी से दूध निकालना
  • पूर्ण हस्त विधि या थन को मुट्ठी के बीच दबाकर दूध निकालना


अंगूठा दबाकर दूध दोहना (निकालना) -

देहात में यह विधि सबसे अधिक अपनायी जाती है ।

इस विधि में थन को चारों उंगलियों और मुड़े हुए अंगूठे के बीच में दबाकर दूध निकाला जाता है । यह विधि अत्यन्त त्रुटिपूर्ण और पशुओं के लिये हानिकारक तथा कष्टदायी होती है ।

इस विधि में पशु के थन पर मुड़े हुए अंगूठे का बहुत अधिक दबाव पड़ता है और पशु कष्ट का अनुभव करता है जिससे वह सारा दूध नहीं उतारता ।

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अंगूठा दबाकर दूध दोहना (निकालना)

इस विधि से लम्बे समय तक दोहन करने पर पशु के थन पर गाँठे भी पड़ जाती है अत: दूध दोहने की इस विधि को नहीं अपनाना चाहिये । इस विधि को नकलिंग भी कहते है ।


चुटकी से दूध निकालना -

यह अधिकांश छोटे थन वाली गायों का दूध निकालने में प्रयोग किया जाता है, जहाँ थन मुट्ठी में पूरी तरह नहीं आ पाते ।

इस विधि में थन को अंगूठे और उनके पास की दो उंगलियों के बीच दबाकर ऊपर से नीचे की ओर खींचा जाता हैं ।

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यह विधि भी पशुओं के लिये अपेक्षाकृत कष्टदायक होती है । अतः इस विधि का प्रयोग भी अच्छा नहीं माना जाता है ।


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पूर्ण हस्त विधि या थन को मुट्ठी के बीच दबाकर -

दूध दोहन की यह सबसे अच्छी विधि है, जिसमें चारों उंगलियों और हथेलियों के बीच में थन को दबाकर दुहा जाता है ।

इस विधि में पशु अपने बच्चे को दूध पिलाने के समान सुख का अनुभव करता है और सारा दूध उतार देता है ।

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इस विधि में पूरे थन पर समान दबाव पड़ता है और कभी भी थन खराब होने का डर नहीं रहता ।

इसे पूर्ण हस्त विधि के नाम से भी जाना जाता है दूध दोहन की यह सर्वोत्तम विधि मानी जाती है ।


2. मशीनों द्वारा दुग्ध दोहन | milking by machine in hindi


बड़े डेरी फार्मों पर मशीनों द्वारा पशुओं का दूध निकाला जाता है ।

मशीन के थन (teat cup) पशु के थनों पर लगा दिया जाता है । मशीन द्वारा निर्वात (vacuum) उत्पन्न किया जाता है जिसके फलस्वरूप थनों से दूध निकलकर दुग्ध बाल्टी (milk pail) में एकत्रित हो जाता है ।

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मशीनों द्वारा दुग्ध दोहन (milking by machine in hindi)

चतुर ग्वालों के अभाव में या जहाँ अधिक पशुओं का दूध निकाला जाता है, मशीन का प्रयोग किया जाता है ।

राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान, करनाल (N.D.R.I. Karnal), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जत नगर (I.V.R.I.Izzat Nagar) पर हाथ से दूध निकालने के साथ - साथ मशीनों से भी दूध निकाला जाता है । प्राय: सैन्य फार्मो (military farms) पर हाथों से ही दूध निकाला जाता है ।


मशीन द्वारा दुग्ध दोहन के क्या लाभ होते है? | advantages of milking by machine in hindi


मशीन द्वारा दुग्ध दोहन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है -

  • पशुओं की अधिक संख्या होने पर मशीन द्वारा शीघ्रता से दूध निकाल लिया जाता है ।
  • चतुर एवं अनुभवी ग्वालों की आवश्यकता की कमी महसूस नहीं हो पाती है ।
  • श्रमिकों की हड़ताल होने पर भी कोई विशेष कठिनाई नहीं आती है ।
  • स्वच्छ दुग्ध उत्पादन आसानी से किया जा सकता है ।


मशीन द्वारा दुग्ध दोहन से क्या हानियाँ होती है? | disadvantages of milking by machine in hindi


मशीन द्वारा दुग्ध दोहन की प्रमुख हानियाँ निम्नलिखित है -

  • मशीन द्वारा पशु का पूर्ण रूप से दूध नहीं निकालना महंगा पड़ता है । क्योंकि थनों में कम दूध होने पर कप्स निकल जाते हैं इसलिये बाकी दूध हाथों से निकालना होता है ।
  • मशीन के आन्तरिक भाग ठीक प्रकार स्वच्छ नहीं हो पाते हैं अतः स्वच्छ दुग्ध उत्पादन में कठिनाई आती है ।
  • पशु संख्या कम होने पर मशीन द्वारा दूध निकालना महंगा पड़ता है ।


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दूध दुहते या निकालते समय क्या-क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए? precautions while milking in hindi


दूध दुहते समय आवश्यक सावधानियाँ निम्नलिखित है -

  • दूध दुहने का समय निश्चित होना चाहिये ।
  • दूध दुहने से पूर्व गाय की भली प्रकार सफाई कर लेनी चाहिये ।
  • ग्वालों के हाथ तथा कपड़े साफ हों तथा वह किसी संक्रामक रोग से ग्रस्त न हो ।
  • दूध के बर्तन अच्छी तरह साफ किये गये हों ।
  • गो - दोहन हाथ की पूरी मुट्ठी के द्वारा करना चाहिये ।
  • गो - दोहन शीघ्रतापूर्वक करना उत्तम रहता है । लगभग 7 मिनट के अन्दर पूरा दूध निकाल लेना चाहिये ।
  • दूध का सदैव ढक कर रखें ।


दूध दुहते समय क्या-क्या नहीं करना चाहियें?


दूध दुहते समय निम्नलिखित बातें नहीं करनी चाहियें -

  • गाय को उत्तेजित करना या डराना नहीं चाहिये ।
  • दूध दुहते समय हाथ में दूध या पानी नहीं लगाना चाहिये ।
  • गो - दोहन के समय हाथ का अंगूठा मोड़कर दूध न निकालें ।
  • दूध को चौड़े मुँह के बर्तन में न निकालें ।
  • ग्वालों को बार - बार नहीं बदलना चाहिये ।
  • दूध की पहली 2 - 3 धार किसी अलग बर्तन में निकाल लेनी चाहिये ।
  • दूध दुहने से पूर्व पशु को दुर्गन्ध युक्त चारा न दें ।


दुग्ध दोहन के बाद क्या-क्या करना चाहिए? post milking practices in hindi


दुग्ध दोहन के पश्चात की जाने वाली क्रियायें निम्नलिखित है -

  • पशुओं का दूध निकालने के पश्चात थनों को पोंछकर सुखा देना चाहिये ।
  • घर में प्रयोग किये जाने वाले दूध को शीघ्रतापूर्वक उबाल लेना चाहिये । गर्मियों में दूध उबालना और भी आवश्यक होता है ।
  • जहाँ दुग्ध उत्पादन अधिक मात्रा में होता है वहाँ दूध को पशुओं से निकालकर तुरन्त ठण्डा कर देना चाहिये । इसके लिये दूध के कैन (can) को ठण्डे पानी में रखकर अथवा केन के ऊपर टॉट का गीला टुकड़ा बांधकर दूध का तापक्रम कम रखा जा सकता है ।


दूध निकालना एवं रुकना में क्या अन्तर होता है?


1. दूध निकालना या दुग्ध दोहन ( Milking In Hindi ) -

गाय, भैंस, बकरी अथवा अन्य किसी भी पशु के थनों से दूध को बाहर करने की क्रिया को दूध निकालना या दुग्ध दोहन (milking in hindi) कहते हैं ।

गाय, भैंस, बकरी आदि का दूध दिन में दो बार सुबह - शाम निश्चित समय पर निकाला जाता है । अधिक दुधारू पशुओं का दिन में तीन बार भी दूध निकाला जाता है ।


हमारे देश में दूध निकालने का कार्य अधिकांश वाला या पशुपालक अपने हाथों से करता है जिसकी निमनांकित तीन विधियाँ हैं -

  1. अंगूठा दबाकर दूध निकालना
  2. चुटकी से दूध निकालना
  3. पूर्ण हस्त विधि से दूध निकालना ।

इसके अतिरिक्त बड़े - बड़े डेयरी फार्मों पर अधिक दुधारू पशुओं का दूध मशीनों के द्वारा निकाला जाता है ।


2. दुग्ध का रुकना ( Milk Stagnation In Hindi ) -

यद्यपि दूध निकालने की क्रिया में शीघ्रता का ध्यान रखना चाहिये परन्तु कुछ विशेष परिस्थितियों में दूध निकालना बन्द करना पड़ जाता है इसे ही दूध का रुकना (milk stagnation in hindi)का रुकना (milk stagnation in hindi) कहते हैं ।

जब कभी पूरा दूध निकालने से पहले बीच में ही दूध निकालना बन्द कर देते हैं तो इसे ही रुकना कहते हैं ।

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