पशुओं को चिह्नित क्यों किया जाता है इसके उद्देश्य, लाभ एवं विधियां लिखिए

बड़े-बड़े डेयरी फार्मों जहां हजारों पशुओं को एक साथ रखा जाता है वहां पर पशुओं को चिह्नित करना अत्यंत आवश्यक होता है, जिससे झुंड में किसी विशेष पशुओं की पहचान आसानी से की जा सके ।

इस प्रक्रिया में पशुओं को चिह्नित करने की प्रमुख विधियों में से किसी एक विधि को अपनाकर पशु को  टैग, नंबर या कोई निशान दिया जाता है जिससे उसकी पहचान होती है ।

पशुओं को चिह्नित करने से विशेष पशुओं (जैसे - ग्याभिन गाय, कोई बीमार पशु एवं नए-पुराने पशुओं) की पहचान करके उसे अलग रखने में सहायता मिलती है ।


पशुओं को चिह्नित क्यों किया जाता है? methods of marking animals in hindi

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पशुओं को चिह्नित क्यों किया जाता है इसके उद्देश्य, लाभ एवं विधियां लिखिए

पशुओं को चिह्नित करना? | marking of animals in hindi

वैसे तो पशुओं को उनके रंग, रुप तथा बाह्य शारीरिक आकृति देखकर आसानी से पहचाना जा सकता है ।

परंतु इस प्रकार से पशुपालक दो-चार पशुओं की ही पहचान कर सकता है, इसलिए एक दूसरे से अलग एवं पहचान के लिए पशुओं को चिह्नित किया जाता है ।


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पशुओं को चिह्नित करने के उद्देश्य लिखिए? | purpose of marking animals in hindi


पशुओं को चिन्हित करने के उद्देश्य निम्नलिखित है -

  • पशु की व्यक्तिगत पहचान के लिये नम्बर अंकित किया जाता है ।
  • पशु सम्बन्धित अभिलेख में पंजीकरण हेतु नम्बर आवश्यक होता है ।
  • पशु मेले या पशु झुण्ड में पशु की पहचान इसी नम्बर से होती है ।
  • पशु निरीक्षण के समय नम्बर से पहचान की जाती है ।


पशुओं को चिह्नित करने के लाभ लिखिए? | benefits of marking animals in hindi


पशुओं को चिह्नित करने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है -

  • पशुओं का अभिलेखों में पंजीकरण संरक्षित रखने में मदद मिलती है ।
  • पशुओं के  चोरी होने पर उनकी पहचान करने में सहायता मिलती है ।
  • हजारों पशुओं के झुण्ड में किसी विशेष पशु की पहचान में सहायता मिलती है ।
  • पशु प्रजनन के समय चयन में सहायता मिलती है ।
  • पशु की नस्ल की पहचान करने में सहायता होती है ।


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पशुओं को चिह्नित करने की विधियां लिखिए? | methods of marking animals in hindi


पशुओं को चिह्नित करने की प्रमुख विधियां -

1. टीन की पत्ती या छल्ला डालकर
2. दागना ( ब्राँडिंग )
( i ) ठण्डा दाग लगाकर ( कोल्ड ब्राँडिंग )
( ii ) गर्म दाग लगाकर ( हाट ब्राँडिंग )
3. गोदना ( टेटूइंग )
4. कानों में छेद करके या किनारे काटकर


पशु को चिन्हित करने की प्रमुख चार विधियाँ -

पशु को चिन्हित करने की चार विधियाँ पशुओं की व्यक्तिगत पहचान बनाने के लिये उन्हें चिन्हित किया जाता है ।


1. टीन की पत्ती या छल्ला डालकर -

यह सबसे सरल तथा सस्ती विधि है । इसमें टोन की पत्ती अथवा धातु के छल्ले के ऊपर पशु का नम्बर अंकित करके उसके कान अथवा गले में मजबूत धागे की सहायता से लटका देते हैं ।


2. दागना ( ब्राँडिंग ) -

पशुओं को निम्नांकित दो प्रकार से दाग लगाकर चिन्हित किया जाता है -


( i ) ठण्डा दाग लगाकर ( कोल्ड ब्राँडिंग ) -

इस विधि में रासायनिक पदार्थों जैसे ब्रान्डन तेल, ब्रान्डिलक्स आदि से पशु पर डाले जाने वाले नम्बर को भिगोकर पशु की जाँघ पर लगा देते हैं जिससे उस स्थान के बाल उतर जाते हैं और पशु का स्थाई नम्बर स्पष्ट दिखाई देता है ।


( ii ) गर्म दाग लगाकर ( हाट ब्राँडिंग ) -

इस विधि में दागने वाले लोहे के यन्त्र पर पशु का नम्बर लगाकर आग पर तापकर लाल कर लिया जाता है तथा पशु को गिराकर अच्छी तरह काबू में करके उसकी जाँघ पर रखकर दाग देते हैं । बाद में दागे हुये स्थान पर मीठा तेल (गोले का तेल) या कार्बोलिक तेल लगा देते हैं ।


3. गोदना ( टेटूइंग ) -

इस विधि में पशु के कान के अन्दर के भाग को स्प्रिट से साफ करके गुदाई मशीन (टेटूईंग मशीन) में पशु का नम्बर लगाकर दबा देते हैं । गुदे हुये स्थान पर नीले रंग की स्याही (टेटूईंग इन्क) लगा देते हैं जिससे गुदे हुए बन्दूकी दार अंक चमकने लगते हैं ।


4. कानों में छेद करके या किनारे काटकर -

इस विधि में पशुओं के कान के अन्दर छेद बनाकर या किनारे काटकर चिन्हित किया जाता है । यह विधि काले रंग के पशुओं जैसे भैंस आदि में अपनाई जाती हैं इस विधि में नोचिंग मशीन या पन्चिंग मशीन से पशु के कान चिन्हित करके टिन्चर आयोडीन लगा देते हैं । यह विधि सुअरों में भी अधिक अपनाई जाती है ।

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