नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) क्या है इसके कारण एवं महत्व लिखिए

सभी फसलों में कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिनमें नर जनन अंग विकसित होते हैं जिसके कारण फलद पराग नहीं बनता है इसे ही नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) कहते है ।

नर बन्ध्यता क्या है? | male sterility in hindi

नर वन्ध्यता अकार्यशील नर युग्मकों से होती है । यह गुणसूत्रीय विपथन (chromosomal aberration), जीन क्रिया या कोशिका द्रव्य के प्रभाव से उत्पन्न होती है ।

नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) जीन्स के प्रभाव या साइटोप्लाज्म के प्रभाव या इन दोनों के सामूहिक प्रभाव से उत्पन्न हो सकती है ।

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नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) क्या है इसके कारण एवं महत्व लिखिए

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उपरोक्त आधार पर नर वन्ध्यता को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है -

  • आनुवंशिक नर - वन्ध्यता ( Genetic Male - Sterility )
  • कोशिका द्रव्यी नर - वन्ध्यता ( Cytoplasmic Male - Sterility )
  • कोशिका द्रव्यी आनुवंशिक नर - वन्ध्यता ( Cytoplasmic Genetic Male Sterility )


नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) के प्रमुख कारण -


1. आनुवंशिक नर वन्ध्यता ( Genetic Male - Sterility )

यह नर वन्ध्यता आनुवंशिक कारकों पर निर्भर करती है । एक जीन पर निर्भर नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) कई भिन्न - भिन्न फसलों वाली जातियों में पाई गयी है । नर वन्ध्यता के लिये अधिकतर जीन्स अप्रभावी होती है ।

नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) स्टॉक की, नर वन्ध्य पौधों का विषम युग्मज उर्वर पौधों के साथ क्रास करके बनाये रखा जाता है जिससे आधी सन्तान बन्ध्य होती है तथा आधी उर्वर विषम युग्मजी (fertile heterozygous) होती है ।

क्रास करने के लिये नर वन्ध्य वंशक्रम को प्राप्त किये जाने वाले नर जनक से एकान्तरित लाइनों में बोते हैं । नर बन्ध्य पंक्तियों में से उर्वर (fertile) पौधों का पता चलते ही निकाल देते हैं ।

यदि नर बन्ध्य पौधों को सहलग्न जीन या नर वन्ध्य जीन्स के बहु - प्रभावी प्रभाव से पहचाने जा सके (जैसा कि लिमा बीन्स में एक विशेष नर वन्ध्य जीन के साथ सम्भव है) तो संकर बीज उत्पन्न करना सरल हो जाता है आनुवंशिक नर बन्ध्यता मक्का, ज्वार, जौं तथा टमाटर में पाई जाती है ।

नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) जीन की उपस्थिति में नपुंसीकरण (emasculation) अनावश्यक हो जाता है तथा क्रास करने के लिये नर वन्ध्य वंशक्रम का प्रयोग किया जाता है ।


2. कोशिका - द्रव्यी नर वन्ध्यता ( Cytoplasmic Male Sterility )

यह नर वन्ध्यता कोशिका - द्रव्यी कारकों पर निर्भर करती है तथा इस प्रकार की नर वन्ध्यता का संचरण कोशिका - द्रव्य के द्वारा होता है । नर बन्ध्य पौधों का सामान्य पौधों से परागण करने पर नर वन्ध्य पौधे ही उत्पन्न होते हैं जो कि जीनी नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) से सर्वथा भिन्न होते हैं क्योंकि जीनी नर वन्ध्य पौधों का सामान्य से परागण करने पर सामान्य पौधे मिलते हैं क्योंकि जीनी नर वन्ध्यता अप्रभावी होती है । कोशिका - द्रव्यी नर बन्ध्यता का कोई सहलग्नता-सह-सम्बन्ध नहीं होता है ।

मक्का में कोशिका - द्रव्यी नर वन्ध्यता कई पीढ़ियों तक बनी रहती है । इसका प्रयोग अलंकृत पौधों में लाभप्रद हो सकता है क्योंकि कोशिका - द्रव्यी नर बन्ध्य पौधों की संतति भी नर बन्ध्य होती है ।

अतः ये उपयुक्त परागद (pollinizer) की अनुपस्थिति में फल रहित रहती है जिससे इनके फूल अधिक समय तक खिले रहते हैं तथा ताजे बने रहते हैं कोशिका - द्रव्यी नर बन्ध्यता का उपयोग उन पौधों का एकल संकर या द्विसंकर उत्पन्न करने के लिये किया जा सकता है जिनके वनस्पतिक भाग से व्यापारिक उत्पादन होता है ।

स्पष्टतः उन फसलों में, जिनमें बीज या फल व्यापारिक उत्पाद होता है, इससे संकर बीज उत्पन्न करना उपयोगी नहीं होता है । ऐसी फसलों में विशेष परागद की व्यवस्था होने पर ही इसका उपयोग किया जा सकता है ।


3. कोशिका - द्रव्यी आनुवंशिक नर वन्ध्यता ( Cytoplasmic - genetic Male - Sterility )

यह नर वन्ध्यता केन्द्रकीय जीन के साथ विशेष साइटोप्लाज्म पर निर्भर करती है । S sterility (वन्ध्यता) तथा F fertility (उर्वरता) प्रदर्शित करता है तथा F जीन S जीन पर प्रभावी होती है ।

एक पौधा नर वन्ध्य हो सकता है यदि इसमें वन्ध्य कोशिका द्रव्य S, और जब दोनों जीन्स भी S या बन्ध्य प्रकार की हो । इसमें उर्वरता तब होती है ।

जबकि पौधा F जीन्स के लिये समयुग्मज FF या विषम युग्मज FS हो तथा कोशिका द्रव्यी वन्ध्य या S प्रकार का हो । इस प्रकार की नर बन्ध्यता प्याज में पायी जाती है ।


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नर बन्ध्यता का महत्व -

फसलों वाले पौधों में नर वन्ध्यता के उपयोग को सर्वप्रथम जोन्स तथा इम्सवेलर ( 1937 ) ने प्याज में किया । नर बन्ध्यता (male sterility in hindi) का संकर बीज उत्पादन के लिये सर्वप्रथम प्रयोग जोन्स तथा डेविस ( 1944 ) ने किया था ।

इन्होंने ही प्याज में कोशिक - द्रव्यी आनुवंशिक नर वन्ध्यता की खोज की थी । इटेलियन रैड वैराइटी में एक पौधा पूर्णतयः नर बन्ध्य पाया गया । इसकी प्रजनन विधि का अध्ययन करने के लिये इसका प्रवर्धन पत्र - प्रकलिकाओं (bulbils) द्वारा किया गया ।

जब इसका संकरण विभिन्न नर उर्वर जनकों के साथ किया गया तो इससे तीन प्रकार के प्रजनन व्यवहार का प्रर्दशन हुआ ।

जो निम्नलिखित है -

  • कुछ सन्तति फिर पूर्णत: नर बन्ध्य थी ।
  • कुछ पूर्णत: नर उर्वर थी ।
  • कुछ ने नर बन्ध्य तथा नर उर्वर सन्ततियों को 1:1 अनुपात में उत्पन्न किया ।

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